اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : Taiba Bulana Aaqa
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 20 Mar, 2023 12:43 PM IST
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Taiba Bulana Aaqa, Taiba Bulana Aaqa
Taiba Bula Ke Dil Ki Hasrat Mitana
Taiba Bulana Aaqa, Taiba Bulana.....
Subh Aur Shaam Lunga Tera Pyara Naam Lunga,
Kabr Mein Aaqa Tere Daman Ko Tham Lunga,
Toh Aisi Ghadi Mein Rukh Se Parda Hathana,
Jalwa Dikhana Aaqa, Jalwa Dikhana.....
Tera Jab Deedar Hoga Dil Ko Karar Hoga,
Tere Hi Karam Se Aaqa Beda Sabka Paar Hoga,
Aaib Hamare Apne Daman Mein Chupana,
Bakshish Karana Aaqa, Bakshish Karana.....
Taiba Bulana Aaqa, Taiba Bulana Aaqa
Rehmat Hai Noor Hai, Kaif Hai, Suroor Hai,
Jalse Mein Dekho Yaaro Jalwae Huzoor Hai,
Noorani Jalsa Hai Yeh Kitna Suhana,
Nabi Ka Deewana Sab Hai Nabi Ka Deewana,
Nabi Ka Deewana Sab Hai Nabi Ka Deewana
Ya Ilahi Meri Yeh, Ya Ilahi Sabki Yeh Ilteja Qubool Ho,
Sabki Lahed Mein Yaaro Jalwae Rasool Ho,
Toh Dekhunga Jee Bhar Ke Unka Muskurana,
Apna Banana Aaqa, Apna Banana Aaqa,
Apna Banana Aaqa, Apna Banana Aaqa
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यह हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की बारगाह में लिखी गई एक बेहद भावुक और रूहानी नात शरीफ़ है। इसमें एक सच्चा आशिक़-ए-रसूल मदीना शरीफ़ (तैबा) जाने की तड़प और मृत्यु के बाद अपनी क़ब्र में आक़ा ﷺ के दीदार की चाहत को बयां कर रहा है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि "हे मेरे प्यारे आक़ा ﷺ! मुझे मदीना (तैबा) बुलाकर मेरे दिल की सबसे बड़ी ख़्वाहिश को पूरा कर दीजिए।" शायर कहता है कि जब मैं इस दुनिया से जाकर क़ब्र के अंधेरे में होऊँगा, तब आप अपने नूरानी चेहरे से पर्दा हटाकर मुझे अपना दीदार कराना, मेरे पापों (ऐबों) को छुपाना और अल्लाह से मेरी मगफ़िरत (माफ़ी) कराना।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| तैबा | मदीना मुनव्वरा का एक पवित्र नाम |
| हसरत | तीव्र इच्छा / मन की अधूरी ख़्वाहिश |
| रुख | चेहरा / मुखड़ा |
| करार / बेड़ा पार | सुकून या शांति / बेड़ा पार होना या मोक्ष मिलना |
| आऐब (ऐब) | बुराइयाँ / दोष या पाप |
| कैफ़ और सुरूर | आध्यात्मिक आनंद और रूहानी सुकून |
| इलतेजा / लहद | प्रार्थना या गुज़ारिश / क़ब्र |
इस मुक़द्दस कलाम का मूल सार यह है कि संसार का हर नबी का दीवाना हुज़ूर ﷺ के प्रेम में डूबा हुआ है। शायर इस महफ़िल (जलसे) को बहुत भाग्यशाली बताता है जहाँ ईश्वर की कृपा और नबी का नूर हर तरफ़ फैला हुआ है। वह ईश्वर (इलाही) से प्रार्थना करता है कि जब भी किसी मोमिन की मृत्यु हो, तो उसकी क़ब्र (लहद) में रसूल-ए-पाक ﷺ का दीदार हो, ताकि हर कोई जी भर के उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख सके और आक़ा ﷺ उसे अपना बना लें।
शायर के मुताबिक, जब वह क़ब्र (लहद) में होंगे, तो वह नबी ﷺ से किस चीज़ की इल्तेजा (गुज़ारिश) कर रहे हैं?