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सुबह ए तैबा में हुई बटता है बड़ा नूर का Lyrics In हिन्दी

(सुबह-ए-तैबा में हुई बटता है बड़ा नूर का, सदका लेने नूर का आया है तारा नूर का)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : सुबह-ए-तैबा में हुई बटता है बड़ा नूर का

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 17 Aug, 2026 08:14 AM IST

बार देखा गया : 12

Time to read: 4 min read

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सुबह-ए-तैबा में हुई बटता है बड़ा नूर का,
सदका लेने नूर का आया है तारा नूर का।

बाग़-ए-तैबा में सुहाना फूल फूला नूर का,
मस्त-ए-बू हैं बुलबुलें पढ़ती हैं कलमा नूर का।

बारहवीं के चाँद का मुजरा है सजदा नूर का,
बारह बुर्जों से झुका इक-इक सितारा नूर का।

इनके क़स्र-ए-क़द्र से खुल्द एक कमरा नूर का,
सिदरा पाएँ बाग़ में नन्हा-सा पौधा नूर का।

अर्श भी फ़िरदौस भी इस शाह-ए-वाला नूर का,
ये मुशम्मन बुर्ज वो मुश्क़ुआ-ए-आला नूर का।

आई बिदअत छाई ज़ुलमत रंग बदला नूर का,
माह-ए-सुन्नत महर-ए-ज़ुलमत ले ले बदला नूर का।

तेरे ही माथे रहा ऐ जान सेहरा नूर का,
बख़्त जागा नूर का चमका सितारा नूर का।

मैं गदा तू बादशाह भर दे प्याला नूर का,
नूर दिन दूना तेरा दे डाल सदका नूर का।

तेरी ही जानिब है पाँचों वक़्त सजदा नूर का,
रुख़ है क़िबला नूर का अबरू है काबा नूर का।

पुश्त पर ढलका सर अनवर से शमला नूर का,
देखें मूसा तूर से उतरा शहीफ़ा नूर का।

ताज वाले देख कर तेरा इमामा नूर का,
सर झुकाते हैं इलाही बोलबाला नूर का।

आब-ए-ज़र बनता है आरिज़ पर पसीना नूर का,
मुशहफ़ी ऐजाज़ पर चढ़ता है सोना नूर का।

पेच करता है फ़िदा होने को लमआ नूर का,
गिर्द-ए-सर फिरने को बनता है इमामा नूर का।

तेरे आगे ख़ाक पर झुकता है माथा नूर का,
नूर ने पाया तेरे सजदे से सीमा नूर का।

तू है साया नूर का हर उज़ू टुकड़ा नूर का,
साया का साया न होता है न साया नूर का।

क्या बना नाम-ए-ख़ुदा असरा का दूल्हा नूर का,
सर पे सेहरा नूर का बर में शहाना नूर का।

वस्फ़-ए-रुख़ में गाती हैं हूरें तराना नूर का,
क़ुदरती बीनों में क्या बजता है लहरा नूर का।

देखने वालों ने कुछ देखा न भला नूर का,
मन-राई कैसा ये आईना देखा नूर का।

नारियों का दौर था दिल जल रहा था नूर का,
तुमको देखा हो गया ठंडा कलेजा नूर का।

जो गदा देखो लिए जाता है तोड़ा नूर का,
नूर की सरकार है क्या इसमें तोड़ा नूर का।

भीख ले सरकार से ला जल्द कासा नूर का,
माह-ए-तैबा में बँटता है महीना नूर का।

तेरी नस्ल-ए-पाक में है बच्चा-बच्चा नूर का,
तू है आईना-ए-नूर तेरा सब घराना नूर का।

नूर की सरकार से पाया दुशाला नूर का,
हो मुबारक तुमको ज़ुन्नूरैन जोड़ा नूर का।

किसके पर्दे ने किया आईना अंधा नूर का,
माँगता फिरता है आँखें हर नगीना नूर का।

अब कहाँ वो ताबिशें कैसा वो तड़का नूर का,
महर ने छुप कर किया ख़ासा धुँधलका नूर का।

अंबिया अजज़ा हैं तो बिल्कुल है जुमला नूर का,
इस इलाक़े से है उन पर नाम सच्चा नूर का।

चाँद झुक जाता जिधर उँगली उठाते महद में,
क्या ही चलता था इशारों पर खिलौना नूर का।

एक सीना तक मुशाबह एक वहाँ से पाँव तक,
हुस्न-ए-सिब्तैन इनके जामों में है नीमा नूर का।

ऐ रज़ा ये अहमद-ए-नूरी का फ़ैज़-ए-नूर है,
हो गई मेरी ग़ज़ल पढ़कर क़सीदा नूर का।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात आला हज़रत امام احمد رضا خان की एक बहुत ही अजीम और खूबसूरत रचना है, जिसमें हज़रत मुहम्मद ﷺ की ज़ात-ए-पाक को नूर का मुजस्मा बताते हुए आपकी रूहानी अजमत और फैज़ को बेहद कलात्मक अंदाज़ में बयान किया गया है।

शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

इस कलाम में शायर ने मदीना शरीफ (तैबा) में नबी-ए-करीम ﷺ की आमद को नूर की बारिश और रोशनी का सबब बताया है। कलाईनात का जर्रा-जर्रा, आसमान, सितारे और यहाँ तक कि पूरा नबी-ए-पाक ﷺ का घराना और उनके आशिक नूर में डूबे हुए नज़र आते हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
तैबामदीना शरीफ का एक मुबारक नाम
सदक़ाकुर्बान किया हुआ / नेमत या बख्शिश
बुर्जगगनचुंबी इमारत या आसमान की राशियाँ
खुल्दजन्नत / स्वर्ग
सिदरासिद्रतुल मुंतहा (सातवें आसमान का आख़िरी मक़ाम)
अर्श व फ़िरदौसअल्लाह का तख्त और जन्नत का मक़ाम
बिदअतशरीयत के खिलाफ नया तरीका या अंधकार
ज़ुलमतअंधेरा या अज्ञानता
आरिज़रुखसार / गाल
आब-ए-ज़रसोने का पानी या सुनहरी चमक

सारांश (Summary)


इस नात का सार यह है कि अल्लाह के नबी ﷺ की हस्ती سراپہ (सरपा) नूर है। आपके आने से दुनिया से अंधेरे और ज़ुल्मत मिट गए, और चारों तरफ हिदायत व रहमत का उजाला फैल गया। शायर इमाम अहमद رضا خان ने आपके हुस्न, आपकी औलाद, और आपके फैज़-ए-आम को नूर से تشبیہ (तशबीह) देकर अपनी अकीदत का अनूठा इज़हार किया है।

इस नात के आख़िर में शायर ने इस कलाम को क्या नाम दिया है और यह किसका फैज़ है?

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