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सबसे सुंदर हमरे आका का दरबार लागेला Lyrics In हिन्दी

(सबसे सुंदर हमरे आका का दरबार लागेला, यानी तैबा नगर में जन्नत के बाज़ार लागेला)


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टाइटल : सबसे सुंदर हमरे आका का दरबार लागेला

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: दिलबर असलमी

जोड़ा गया : 07 Sep, 2025 07:28 AM IST

बार देखा गया : 858

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

सबसे सुंदर हमरे आका का दरबार लागेला,
यानी तैबा नगर में जन्नत के बाज़ार लागेला।

नबी का जो भइलन दीवाना, ओकरे जन्नत बा ठिकाना,
दुनिया के हर ग़म से ओकर बेड़ा पार लागेला।
यानी तैबा नगर में जन्नत के बाज़ार लागेला।

पसीना आका का जो पइलन, तो महके लागल बा दुल्हन,
ओकर गोद के हर एक बच्चा खुशबूदार लागेला।
यानी तैबा नगर में जन्नत के बाज़ार लागेला।

वहाबी छोड़ दे ज़बरदस्ती, यह है दीवानों की बस्ती,
वहाबी छोड़ दे ज़बरदस्ती, यह है सुन्नियों की बस्ती,
यहाँ के सुन्नी आला हज़रत के तलवार लागेला।

यानी तैबा नगर में जन्नत के बाज़ार लागेला।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

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यह कलाम भोजपुरी मिश्रित उर्दू में नबी ﷺ की महिमा और मदीना शरीफ की आध्यात्मिक सुंदरता का वर्णन करता है। इसमें हुज़ूर ﷺ के प्रति दीवानगी और अक़ीदत को बहुत ही गर्व और जोश के साथ पेश किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

कवि कहता है कि मेरे आका ﷺ का दरबार संसार में सबसे सुंदर है, जहाँ की फिजाओं को देखकर ऐसा लगता है मानो मदीना की नगरी में जन्नत का बाज़ार सजा हो। जो भी नबी ﷺ का सच्चा दीवाना बन जाता है, उसे दुनिया के दुखों से मुक्ति मिल जाती है और उसका अंततः ठिकाना जन्नत ही होता है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
लागेलालगता है (Appears to be)
भइलनबन गया / हो गया
ओकर/ओकरेउसका / उसके लिए
बेड़ा पारउद्धार होना / सफल होना
पइलनपाया / प्राप्त किया
महकेसुवासित होना / खुशबू आना
तलवारयहाँ अर्थ है 'दलीलों या ज्ञान की तेज़ी'

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि मदीना की हर चीज़ मुकद्दस और खुशबूदार है, यहाँ तक कि नबी ﷺ के पसीने की बरकत से बच्चों और दुल्हनों तक में महक बस जाती है। अंत में कवि अपनी धार्मिक पहचान (सुन्नी) पर गर्व करते हुए कहता है कि यह बस्ती उन दीवानों की है जो आला हज़रत के इल्म और उनकी शिक्षाओं पर मज़बूती से अडिग हैं।

"नबी का जो भइलन दीवाना, ओकरे जन्नत बा ठिकाना"—क्या यह पंक्ति हमें यह याद नहीं दिलाती कि ईश्वर के प्रिय बनने का सबसे सरल मार्ग उनके नबी ﷺ से प्रेम करना ही है?

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