मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ओवैस रज़ा कादरी
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 28 Sep, 2023 03:32 AM IST
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पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई,
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
या रसूलल्लाह सल्ला अलै सल्ला अलै
या हबीबल्लाह सल्ला अलै सलाम अलै
आए सरकार आए मेरे दिलदार आए,
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
हर एक सात ओ लम्हा है क़ीमती इसका,
हर एक रात से बढ़ कर मिला इसे रुत्बा,
इसी लिए तो यह शब बेहतरीन कहलायी
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
ख़ुदा का शुक्र करो और पढ़ो दुरूद उन पर,
के आज लाए हैं तशरीफ़ हदीय ओ रहबर,
ज़माने भर में है मशहूर जिनकी यकतायी
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
चाहते हैं बदल ए ग़म खुशियाँ साथ लाई है,
हर एक चेहरे पे अब मुस्कुराहट आई है,
हर एक दिल में खुशी की बाज़ी है शहनाई
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
जहाँ में सब्ज़ परचमों की बहार आई है,
और आशिकों ने मकान हर गली सजाई है,
है शाद शाद नबी का हर एक तमन्नाई
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
जहाँ गूंज उठा मरहबा के नारों से,
ख़ुशी है कैसी न पूछो ये ग़म के मारों से,
यही वो रात है जो कैफ़ का समा लाई
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
उन्हीं के दर से ही दरिया-ए-जूड बहते हैं,
वो आए जो नहीं साइल को नहीं कहते हैं,
सख़ावत ऐसी अता रब ने उनको फरमायी
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
शब ए विलादत ए सरकार का है यह सदका,
के मिल गया है सना का उबैद को जज़्बा,
मुसाफ़िर इसकी यह मेहनत तभी तो रंग लाई
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
या रसूलल्लाह सल्ला अलै सल्ला अलै
या हबीबल्लाह सल्ला अलै सलाम अलै
आए सरकार आए मेरे दिलदार आए,
पढ़ो दुरूद के मौलूद की घड़ी आई
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यह कलाम ईद-मिलाद-उन-नबी ﷺ की खुशी और उस मुबारक रात की फजीलत को समर्पित है, जो पूरी दुनिया के लिए रहमत और नूर लेकर आई है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ के जन्म (विलादत) की घड़ी दुनिया की सबसे कीमती घड़ी है, जिसका रुतबा हर रात से बड़ा है क्योंकि आज के दिन मानवता को सही रास्ता दिखाने वाले रहबर तशरीफ़ लाए हैं। शायर कहता है कि उनके आने से गम के बादल छँट गए हैं और चारों ओर खुशियों का माहौल है, इसलिए हमें शुक्रगुज़ार होकर उन पर दुरूद भेजना चाहिए।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मौलूद | जन्म या पैदा होने का समय (Milad) |
| सात ओ लम्हा | हर एक पल और घड़ी |
| हदीय ओ रहबर | मार्गदर्शन करने वाला और नेता |
| यकतायी | बेमिसाल या अद्वितीय होना |
| दरिया-ए-जूड | उदारता और दानशीलता का दरिया |
| कैफ़ | आध्यात्मिक आनंद या सुकून |
| शाद | प्रसन्न या खुश |
इस नात का सार यह है कि नबी ﷺ की विलादत की रात आशिकों के लिए ईद की तरह है, जिसे वे हरे परचमों और सजावट के साथ मनाते हैं। शायर वर्णन करता है कि हुज़ूर ﷺ इतने सखी हैं कि उनके दर से कोई खाली नहीं जाता और उन्हीं के सदके में दुनिया को खुशियाँ नसीब हुई हैं। यह रात दुखी दिलों के लिए सुकून और मरहबा की गूँज लेकर आई है।
शायर ने मौलूद की रात को "हर एक रात से बढ़ कर" क्यों कहा है?