search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

नबी नबी नबी नबी Lyrics In हिन्दी

(नबी नबी नबी नबी, चमन चमन की दिल कशी गुलों की है वो ताज़गी)


Written By

avatar
Shan E Nabi Team Desk
  • Editors Desk
  • Addednot available
  • visibilityबार देखा गया
  • comment टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
...

टाइटल : नबी नबी नबी नबी

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी

नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी

जोड़ा गया : 26 May, 2022 11:09 AM IST

बार देखा गया : 5K

Time to read: 4 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

चमन चमन की दिल कशी, गुलों की है वो ताज़गी
है चाँद जिन से शबनमी, वो कहकशाँ की रौशनी
फ़ज़ाओं की वो रागनी, हवाओं की वो नग़्मगी
है कितना प्यारा नाम भी

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

ये आमद-ए-बहार है, वो नूर की क़तार है
फ़ज़ा भी ख़ुशगवार है, हवा भी मुश्कबार है
हवा से मैंने जब कहा, ये कौन आ गया बता
हवा पुकारती चली

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

ज़मीं बनी ज़माँ बने, मकीं बने मकाँ बने
चुनी बने चुना बने, वो वज्ह-ए-कुन-फ़काँ बने
कहा जो मैंने, ए ख़ुदा ! ये किस के सदक़े में बना ?
तो रब ने भी कहा यही

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

जो सिदरा पर नबी गए, तो जिब्रईल बोले ये
ज़रा गया उधर परे, तो जल पढ़ेंगे पर मेरे
नबी ही आगे चल पड़े, वो सिदरा से निकल पड़े
ज़मीं पुकारती रही

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

वो हुस्न-ए-ला-ज़वाल है, वो इश्क़ बे-मिसाल है
जो चर्ख़ का हिलाल है, नबी का वो बिलाल है
बदन सुलगती रेत पर, कि थरथरा उठे हजर
ज़बाँ पे था मगर यही

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

चले जो क़त्ल को उमर, कहा किसी ने रोक कर
कहाँ चले हो और किधर, मिज़ाज क्यूँ है अर्श पर
ज़रा बहन की लो ख़बर, फ़िदा है वो रसूल पर
वो कह रही है हर घड़ी

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

उमर चले बहन के घर, ग़ज़ब में सोच सोच कर
उड़ाएँगे हम उन का सर, जो हैं नबी के दीन पर
सुना है जब क़ुरआन को, ख़ुदा के उस बयान को
उमर ने भी कहा यही

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

वो हिजरत-ए-रसूल है, फ़ज़ा-ए-दिल-मलूल है
क़दम क़दम बबूल है, क़ज़ा की ज़द में फूल है
अली की एक ज़ात है, कि तेग़ पर हयात है
अली के दिल में बस यही

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

वो इश्क़ का हुसूल है, वो सुन्नियत का फूल है
वो ऐसा बा-उसूल है कि आशिक़-ए-रसूल है
रज़ा से मैंने जब कहा, ये शान किस की है अता ?
रज़ा ने दी सदा यही

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

रज़ा का ये पयाम है, वज़ीफ़ा-ए-तमाम है
वही तो नेक नाम है, नबी का जो ग़ुलाम है
जो आशिक़-ए-नबी हुवा, ख़ुदा का वो वली हुवा
वही हुवा है जन्नती

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

मदीने की ज़मीं रहे, वो रौज़ा-ए-हसीं रहे
मज़ार-ए-शाह-ए-दीं रहे, ग़ुलाम की जबीं रहे
तो रूह निकले झूम के, दर-ए-नबी को चूम के
यही पुकारती हुई

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

वो जब समाँ हो हश्र का, हर एक शख़्स जा-ब-जा
अज़ाब में हो मुब्तला, कि यक-ब-यक उठे सदा
सरापा नूर आ गए, मेरे हुज़ूर आ गए
तो कह उठे ये उम्मती

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

थकी थकी रुकी रुकी, किसी तरह दबी-लची
हलीमा-बी की ऊँटनी, जो मक्के में पहुँच गई
थे सारे बच्चे जा चुके, जगह वो अपनी पा चुके
बचा था एक आख़री

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

वो रूह के तबीब से, असद ! कभी नसीब से
ख़ुदा के उस हबीब से, मिलोगे जब क़रीब से
नबी की एक ज़ात है, जो मंब-ए-हयात है
मिलेगी दाइमी ख़ुशी

नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी
नबी नबी नबी नबी, नबी नबी नबी नबी

wand_stars
Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

keyboard_arrow_down

यह एक अत्यंत सुंदर, रूहानी और जोश से भरपूर नात शरीफ़ है, जिसमें संपूर्ण सृष्टि की सुंदरता को पैगंबर मुहम्मद ﷺ के नूर का सदक़ा बताया गया है और उनके इतिहास से जुड़े कई महान वाक़यात का ज़िक्र किया गया है।

 

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि ब्रह्मांड की हर सुंदरता—बागों की रौनक, फूलों की ताज़गी और हवाओं की सरसराहट—सब हुज़ूर ﷺ के पावन नाम की बरकत से है। पूरी सृष्टि (धरती, आकाश, मकान और मकीन) को ईश्वर ने अपने महबूब के सदक़े में 'कुन' (हो जा) कहकर बनाया है। यहाँ तक कि मे'राज की रात सिदरतुल मुंतहा पर फ़रिश्ते जिबरील (अ.स.) के पर जलने का जहाँ डर था, वहाँ से भी आगे केवल हमारे नबी ﷺ ही तशरीफ़ ले गए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
मुश्कबारकस्तूरी जैसी ख़ुशबू से भरी हुई
वज्ह-ए-कुन-फ़काँपूरी सृष्टि (ब्रह्मांड) की रचना का मुख्य कारण
सिदरासातवें आसमान की सीमा पर स्थित एक पवित्र वृक्ष का स्थान
हुस्न-ए-ला-ज़वालऐसा सौंदर्य जिसका कभी अंत न हो (अमर सौंदर्य)
चर्ख़ का हिलालआसमान का नया चाँद
मंब-ए-हयातजीवन का मूल स्रोत

सारांश (Summary)

इस नात में रसूल-ए-पाक ﷺ की अज़मत के साथ-साथ उनके सच्चे आशिकों की गाथाएँ गाई गई हैं; जैसे तपती रेत पर हज़रत बिलाल (र.अ.) का अडिग ईमान, बहन के घर क़ुरआन की आयतें सुनकर हज़रत उमर (र.अ.) का हृदय परिवर्तन, और हिजरत की रात अपनी जान की परवाह किए बिना नबी के बिस्तर पर सोने वाले हज़रत अली (र.अ.) का शौर्य। आलाहज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के पैग़ाम का हवाला देते हुए अंत में कवि कहता है कि जो भी नबी का सच्चा ग़ुलाम बनता है, वही वास्तविक जन्नती है और प्रलय (हश्र) के घोर संकट में भी हुज़ूर ﷺ ही अपनी उम्मत का बेड़ा पार लगाएंगे।

मे'राज की रात, सातवें आसमान की सरहद पर मौजूद किस मक़ाम (वृक्ष) पर पहुँच कर हज़रत जिबरील (अ.स.) रुक गए थे और आगे जाने से उनके पर (पंख) जलने का डर था?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर:

प्रसिद्ध कलाकार/गीतकार

सभी देखें