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नाते रसूल पाक मिसरा है खूबतर Lyrics In हिन्दी

(नाते रसूल पाक मिसरा है खूबतर, या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर)


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टाइटल : नाते रसूल पाक मिसरा है खूबतर

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी

जोड़ा गया : 11 Sep, 2025 01:44 PM IST

बार देखा गया : 1K

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

नात-ए-रसूल पाक मिसरा है खूबतर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

इंसान तो इंसान है, कहते हैं जानवर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

दीदार-ए-मुस्तफ़ा को ये दिल बेक़रार था,
वो आ रहे हैं जिनका हमें इंतज़ार था,
उम्मत बरोज़-ए-हश्र कहेगी ये झूम कर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

नज़ारा जब किया तेरे हुस्न-ओ-जमाल का,
पानी उतर गया था फलक के हिलाल का,
प्यारे नबी को देख के ये कह उठा क़मर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

सरकार के चेहरे पे जब उनकी नज़र पड़ी,
हज़रत उमर के हाथ से तलवार गिर गई,
रूए नबी को देख कर बोले यही उमर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

दीदार जब तलक न हुआ था हुज़ूर का,
फूलों को अपने हुस्न-ए-मुजस्सम पे नाज़ था,
कहते हैं अब ये फूल भी आका को देख कर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

रूह-उल-अमीन सारा जहां घूम के बोले,
सरकार के क़दमों को यही चूम के बोले,
तुमसा हसीं कोई भी आया नहीं नज़र,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

जब इश्क़-ए-मुस्तफ़ा में वो सरशार हो गए,
अपनी ज़ुबान से वो सिद्दीक़ कह उठे,
हर फ़र्द मेरे घर का है क़ुर्बान आप पर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

दोनों जहाँ का तू हसीं इन्तेख़ाब है,
कैसे मिले जवाब के तू लाजवाब है,
बाद अज़ ख़ुदा बुज़ुर्ग तू ही, क़िस्सा मुख़्तसर,
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर
या साहिब अल-जमाल वा या सैय्यद अल-बशर

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ के बेमिसाल सौंदर्य और उनकी महानता का एक ऐसा वर्णन है, जिसमें हज़रत जामी (r.a) के प्रसिद्ध अरबी मिसरे का उपयोग किया गया है। इसमें सृष्टि की हर चीज़ को उनकी सुंदरता का गुणगान करते हुए दिखाया गया है।

ख्या (Lyrics Explanation)

कवि कहता है कि नबी ﷺ का चेहरा इतना नूरानी है कि उसे देखकर आसमान के चाँद की चमक भी फीकी पड़ गई। उनकी सुंदरता का प्रभाव ऐसा है कि हज़रत उमर (r.a) जैसा साहसी व्यक्ति भी उनके चेहरे की शांति देखकर अपनी तलवार गिरा देता है, और पूरी कायनात उन्हें मानवता का श्रेष्ठतम गौरव मानती है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
साहिब अल-जमालसुंदरता के स्वामी / अत्यंत सुंदर
सैय्यद अल-बशरसमस्त मानव जाति के सरदार
बरोज़-ए-हश्रकयामत (न्याय) के दिन
हिलाल / क़मरचाँद (Moon)
हुस्न-ए-मुजस्समसाक्षात सुंदरता / सुंदरता की मूर्ति
रूह-उल-अमीनहज़रत जिब्राईल (A.S) (देवदूत)
सरशारपूरी तरह डूबा हुआ या मदहोश
बाद अज़ ख़ुदाईश्वर के बाद

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि ईश्वर के बाद इस पूरे ब्रह्मांड में सबसे ऊँचा और सम्मानित स्थान केवल हज़रत मोहम्मद ﷺ का है। कवि ने विभिन्न उदाहरणों से यह स्पष्ट किया है कि चाहे फ़रिश्ते हों, फूल हों या नबी के महान साथी, सभी उनके बेमिसाल हुस्न और रुतबे के सामने नतमस्तक हैं। "क़िस्सा मुख़्तसर" यानी संक्षेप में यही सत्य है कि उनके जैसा कोई दूसरा नहीं है।

"बाद अज़ ख़ुदा बुज़ुर्ग तू ही, क़िस्सा मुख़्तसर"—क्या यह एक पंक्ति नबी की पूरी शान को समेटने के लिए काफ़ी नहीं है?

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