मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मुस्तफा हैं लाजवाब
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 19 Mar, 2025 03:53 PM IST
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मुस्तफ़ा हैं ख़ेरुल वरा हैं,
मुस्तफ़ा हैं शमशुद दुहा हैं,
मुस्तफा हैं बदरुद दूजा हैं
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
उनसे पहले दहर में आया ना ऐसा इन्कलाब,
दे रहे हैं ये गवाही, आप का वो माहताब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
आप भी पढ़ लीजिए मुस्तफा हैं लाजवाब
कुफ्र ओ जहालत के अँधेरे छट गए ,
एक बा एक कुफ्र ओ जहालत के अँधेरे छट गए,
रोशनी से पट गए, रोशनी से पट गए,
उनके कामदों से खिले पत्थर पे रहमत के गुलाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
अपने जैसा कहने वाले से सईद सईयद-ए-अबरार को, अहमद-ए-मुख्तार को,
अब भी तोबा कर कह दे, तुझको मिल जाए सवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
हर अदा है नूर-ओ-रहमत, हर अदा क़ुरान है, आशिको की जान है,
एक उंगली ने पढाया दहेर को उम्मुल किताब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
आप हैं तालिब खुदा के, आप ही मतलूब हैं,
बिल यकीन मेहबूब है, बिल यकीन मेहबूब है,
अज़मतें बख्शी हैं रब ने आप ही को बेहिसाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
फूल से तितली ने पूछा, हम पे किसका रंग है,
जिस पे दुनिया दंग है,
फूल ने हँस कर कहा तू सुन ले अब मेरा जवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
पूछ लो सिद्दीक से, फारूक से, उस्मान से, सलमान से,
उन के दुश्मन के लिए दोज़ख़ में दहका है अज़ाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
कायनातें रंग ओ बू में, जलवा गाहे नाज़ में, मुनफ़रीद अंदाज़ में,
हुशन सरकार-ए-दो-आलम, हर जगह है कामयाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब,
मुस्तफा हैं लाजवाब, मुस्तफा हैं लाजवाब
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यह कलाम हुज़ूर ﷺ की बेमिसाल अज़मत और उनकी शान-ए-मुस्तफ़ा को बयान करता है। इसमें बताया गया है कि नबी करीम ﷺ के आने से पूरी दुनिया की कायापलट हो गई और उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता।
इन पंक्तियों में शायर कहता है कि मुस्तफ़ा ﷺ "लाजवाब" हैं, यानी उनकी कोई मिसाल नहीं है। उनके आने से कुफ्र और जहालत का अँधेरा मिट गया और दुनिया रौशनी से भर गई। वे अल्लाह के महबूब हैं जिन्हें खुदा ने बेहिसाब अज़मतें और अधिकार दिए हैं।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| ख़ेरुल वरा | तमाम सृष्टि में सबसे उत्तम |
| शमशुद दुहा | चाश्त (सुबह) का सूरज |
| बदरुद दूजा | अंधेरी रात का चाँद |
| दहर | ज़माना या दुनिया |
| मुनफ़रीद | अनोखा या सबसे अलग |
| मतलूब | जिसकी चाहत की जाए |
| सईयद-ए-अबरार | नेक लोगों के सरदार |
इस नात का सार यह है कि पैग़म्बर मोहम्मद ﷺ अल्लाह की सबसे सुंदर और श्रेष्ठ रचना हैं। उनकी हर अदा कुरान की शिक्षाओं का आईना है। दुनिया और कायनात की हर चीज़—चाहे वो फूल हो या सितारे—उनकी अज़मत की गवाही देती है। जो उन्हें अपने जैसा समझने की भूल करते हैं, उन्हें अपनी सोच सुधारने की नसीहत दी गई है।
नात के आखिरी मिसरों (पंक्तियों) के अनुसार, "सरकार-ए-दो-आलम" का हुस्न कहाँ कामयाब है और पूरी कायनात उनके "जलवा-गाहे नाज़" में किस अंदाज़ में नज़र आती है?