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मुस्कुराने लगी हर तरफ रोशनी Lyrics In हिन्दी

(मुस्कुराने लगी हर तरफ रोशनी, ज़ुल्मतों पर यकीनन ज़वाल आगया)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : मुस्कुराने लगी हर तरफ रोशनी

श्रेणी (कटेगरी) : मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : अख्तर काशिफ़

नातख्वान/कलाकार: अख्तर काशिफ़

जोड़ा गया : 02 Sep, 2025 07:46 AM IST

बार देखा गया : 2.2K

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मुस्कुराने लगी हर तरफ रोशनी,
ज़ुल्मतों पर यकीनन ज़वाल आगया

ये ज़मीन हो गई रश्क-ए-खुल्द-ए-बारी,
जिस घड़ी आमिना बी का लाल आगया

प्यार क्या चीज़ है, प्यार होता है क्या,
जान लोगे पढ़ो सीरत-ए-मुस्तफा,
रात भर गा में रोते रहे मुस्तफा,
जिस घड़ी उम्मति का ख्याल आग

ये हकीकत है काले थे वो रंग के,
निस्बत-ए-मुस्तफा की आता देखिये,
हुश्न वाले खड़े देखते रह गये,
जिस घड़ी हश्र में नबी का बेलाल आ गया

ये ज़मीन हो गई रश्क-ए-खुल्द-ए-बारी,
जिस घड़ी आमिना बी का लाल आगया

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम हुज़ूर ﷺ के आने से दुनिया में आए बदलाव और उनकी अपनी उम्मत के प्रति तड़प को बयान करता है। इसमें बताया गया है कि नबी ﷺ की निस्बत (जुड़ाव) इंसान के रुतबे को दुनियावी खूबसूरती से कहीं ऊपर कर देती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में शायर कहता है कि मुस्तफा ﷺ के आने से अंधकार और बुराई का अंत हो गया और यह ज़मीन जन्नत के लिए भी ईर्ष्या का कारण बन गई। हुज़ूर ﷺ की सीरत (जीवन) ही प्रेम की असली परिभाषा है, क्योंकि उन्होंने रातों को जागकर अपनी उम्मत की मगफिरत के लिए आँसू बहाए हैं।

शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ - Meaning (English/Hindi)
ज़ुल्मतों (Zulmaton)Darkness / अंधकार या बुराई
ज़वाल (Zawal)Decline / पतन या अंत होना
रश्क-ए-खुल्द (Rashk-e-Khuld)Envy of Paradise / जन्नत का गर्व करना
सीरत (Seerat)Character / जीवन चरित्र या आचरण
निस्बत (Nisbat)Connection / जुड़ाव या संबंध
हश्र (Hashr)Day of Judgment / कयामत का दिन

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि पैगंबर मोहम्मद ﷺ का जीवन प्रेम, त्याग और समानता का संदेश है। हज़रत बिलाल (र.अ.) का उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि इस्लाम में रंग या रूप की अहमियत नहीं, बल्कि नबी ﷺ से सच्चा प्रेम ही इंसान को कयामत के दिन सबसे ऊँचा मुकाम दिलाएगा।

बेशक, "हश्र में नबी का बेलाल आ गया" वाला हिस्सा हमें याद दिलाता है कि उस कठिन घड़ी में केवल वही लोग कामयाब होंगे जिनके पास मुस्तफा ﷺ की गुलामी का पट्टा होगा।

नात के आखिरी बंद के अनुसार, हश्र के मैदान में "निस्बत-ए-मुस्तफा" की वजह से हज़रत बिलाल (र.अ.) का रुतबा कैसा होगा और उन्हें देख कर "हुस्न वाले" किस हाल में होंगे?

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