मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मुहम्मद मुस्तफा आए
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : हाफिज़ फैज़ुल हसन
नातख्वान/कलाकार: हाफिज़ फैज़ुल हसन
जोड़ा गया : 16 Sep, 2024 08:33 AM IST
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मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा,
मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा
मेरे मुस्तफ़ा आ गए, मुर्तज़ा आ गए,
मेरे आक़ा मेरे पेशवा आ गए,
जगमगाने लगी नूर से कायनात,
ख़त्म होगा अब ज़ुल्म-ओ-तसद्दुद का अब,
सारे आलम के मुश्किल-कुशा आ गए।
या नबी या नबी या नबी
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
हबीबे ख़ालिके दावर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए,
नबूवत की सनद लेकर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए।
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
हैं रक्शा नूर से जिनके सितारे अर्श-ए-आज़म पर,
वो नूर-ए-दो जहाँ बनकर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए।
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
फ़रिश्ते सदयाने सदमनी के बजाते हैं,
अजब अंदाज़ से सरवर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए।
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
ना चमके दहर में क्यों मशअल-ए-नूर-ए-अज़ल हर सू,
तजम्मुल से माह-ए-अनवर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए।
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
जो बीबी आमिना और ख़्वाजा अब्दुल्लाह के प्यारे हैं,
वो मेहबूब-ए-ख़ुदा बनकर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए।
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
दिया आए ताज-ए-मुज़्दा जिनका मूसा और ईसा ने,
वही सुल्तान-ए-बह्र-ओ-बर मुहम्मद मुस्तफ़ा आए।
सलातुल्लाह सलामुल्लाह अ़लैका या रसूलल्लाह, अ़लैका या हबीबल्लाह
मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा,
मरहबा मरहबा मरहबा मरहबा
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यह कलाम हुज़ूर ﷺ की विलादत (जन्म) की खुशी और उनकी आमद से कायनात में आए बदलावों का जश्न मनाता है। इसमें नबी-ए-करीम ﷺ को मानवता का रक्षक और खुदा का सबसे प्रिय महबूब बताया गया है।
शायर कहता है कि मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के आने से दुनिया से ज़ुल्म और अंधकार का अंत हो गया और पूरी कायनात नूर से जगमगा उठी। फ़रिश्ते भी उनकी आमद की खुशियाँ मना रहे हैं, क्योंकि वे नबूवत की मोहर लेकर आए हैं और उनकी गवाही मूसा (अ.स) और ईसा (अ.स) जैसे पैगंबरों ने भी दी थी।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पेशवा (Peshwa) | मार्गदर्शक / नेता |
| तसद्दुद (Tasaddut) | अत्याचार / ज़ुल्म |
| मुश्किल-कुशा (Mushkil Kusha) | कठिनाइयों को दूर करने वाला |
| ख़ालिके दावर (Khalike Dawar) | पूरी दुनिया को बनाने वाला (अल्लाह) |
| अर्शे आज़म (Arsh-e-Aazam) | अल्लाह का सिंहासन |
| मुज़्दा (Muzda) | खुशखबरी |
| सुल्तान-ए-बह्र-ओ-बर | ज़मीन और समंदर के बादशाह |
इस नात का सार यह है कि पैग़म्बर मोहम्मद ﷺ का जन्म समस्त सृष्टि के लिए अल्लाह की सबसे बड़ी रहमत है। उनके आने से मानवता को नई दिशा मिली और हक की रोशनी फैली। यह कलाम उनके प्रति सम्मान और उनके आने की अपार खुशी को "मरहबा" के नारों के साथ व्यक्त करता है।
नात के आखिरी बंद (पद) के मुताबिक, वो कौन से दो अम्बिया (Prophets) हैं जिन्होंने सुल्तान-ए-बहर-ओ-बर (हुज़ूर ﷺ) के आने की खुशखबरी (मुज़्दा) दी थी?