मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मोमिन की पहचान अली है वलियों का सुलतान अली है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 18 Apr, 2023 09:07 PM IST
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मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
हसन हुसैन हैं मोती जिस के
वो हीरों की खान अली है
वलियों का सुलतान अली है
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
हिजरत की शब सब ने देखा
आक़ा पर क़ुर्बान अली है
वलियों का सुलतान अली है
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
ये फ़रमाया मेरे नबी ने
मेरा जिस्म और जान अली है
वलियों का सुलतान अली है
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
अली इमाम-ए-मन-अस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-अली
हज़ार जान-ए-गिरामी फ़िदा ब-नाम-ए-अली
जिस की दीद इबादत ठहरी
वो कामिल इंसान अली है
वलियों का सुलतान अली है
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
वल्लाह बिल्लाह सुम्मा तल्लाह
बख़्शिश का सामान अली है
वलियों का सुलतान अली है
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
जो साइल को सारा दे दे
अजमल ! वो सुलतान अली है
वलियों का सुलतान अली है
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
हैदर-हैदर, अली-अली और मौला-मौला बोलेगा
इश्क़-ए-अली में पाक लहू का क़तरा क़तरा बोलेगा
दीवाने को मौत के डर से धमकाने की भूल न कर
बोलने वाला दर पे चढ़के मौला-मौला बोलेगा
होती है ईमान की दुश्मन बुग़्ज़-ए-अली की बीमारी
जिस को ये बीमारी होगी उल्टा सीधा बोलेगा
मोमिन की पहचान अली है
वलियों का सुलतान अली है
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यह अमीर-उल-मोमिनीन हज़रत अली अलयहिस्सलाम की शान, उनके अद्वितीय बलिदान और आध्यात्मिक सर्वोच्चता को समर्पित एक बेहद जोश से भरा हुआ अक़ीदत का नज़राना (मनक़बत) है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि एक सच्चे मोमिन (आस्थावान) की सबसे बड़ी कसौटी और पहचान हज़रत अलीؑ से प्रेम करना है, क्योंकि वे समस्त सूफी संतों व वलियों के सम्राट हैं। स्वयं पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ ने हज़रत अलीؑ को अपना जिस्म और अपनी जान घोषित किया है, जिससे उनका अद्वितीय आध्यात्मिक स्थान सिद्ध होता है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| मोमिन / वली | सच्चा आस्तिक / अल्लाह का मित्र (संत) |
| हिजरत की शब | मक्का से मदीना प्रवास की रात |
| जान-ए-गिरामी | अमूल्य या प्रिय जीवन |
| दीद / कामिल इंसान | दर्शन (देखना) / सर्वगुण संपन्न श्रेष्ठ मनुष्य |
| साइल / दार (दर) | याचक (माँगने वाला) / सूली या फाँसी का फंदा |
| बुग़्ज़-ए-अली | हज़रत अली से द्वेष, नफ़रत या ईर्ष्या |
इस मनक़बत का मुख्य सार यह है कि हज़रत अलीؑ का व्यक्तित्व त्याग, दानशीलता और अटूट वफ़ादारी का प्रतीक है, जिन्होंने हिजरत की रात अपनी जान की परवाह न करते हुए नबी के बिस्तर पर सोकर अनुपम मिसाल पेश की। फारसी पंक्तियों के माध्यम से बताया गया है कि अली मेरे इमाम हैं और उन पर हज़ारों कीमती जानें न्योछावर हैं। अंत में, कवि 'अजमल' चेतावनी देता है कि अली से नफ़रत (बुग़्ज़) करने वाले का ईमान नष्ट हो जाता है, जबकि उनका सच्चा दीवाना मौत या सूली (दार) के डर से कभी नहीं झुकता और आखिरी सांस तक 'मौला मौला' पुकारता रहता है।
लिरिक्स के मुताबिक, नबी ने हज़रत अली को अपना क्या फ़रमाया है?