اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : Mere Husain Tujhe Salam
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अरशद रज़ा कादरी अमरोहवी विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: अरशद रज़ा कादरी अमरोहवी हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी नदीम रज़ा क़ुरैशी (पीलीभीती) ओवैस रज़ा कादरी सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 28 Jul, 2023 07:27 AM IST
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Mere Husain Tujhe Salam,
Mere Husain Tujhe Salam
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain
Kar Liya Nosh Jis Ne Shahadat Ka Jaam,
Us Husain Ibn-E-Haidar Pe Lakhon Salam
Mere Husain Tujhe Salam,
Mere Husain Tujhe Salam
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain
Jis Ko Dhoke Se Koofe Bulaya Gaya,
Jis Ko Baithe Bithae Sataya Gaya,
Jis Ke Bhai Ko Zaher Pilaya Gaya,
Jis Ke Bachchon Ko Pyasa Rulaya Gaya,
Us Husain Ibn-E-Haidar Pe Lakhon Salam
Mere Husain Tujhe Salam,
Mere Husain Tujhe Salam
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain
Jis Ka Jannat Se Joda Mangaya Gaya
Jin Ko Dosh-E-Nabi Par Bithaya Gaya
Jin Ki Gardan Pe Khanzar Chalaya Gaya
Jin Ko Teeron Se Chalni Karaya Gaya
Us Husain Ibn-E-Haidar Pe Lakhon Salam
Mere Husain Tujhe Salam,
Mere Husain Tujhe Salam
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain
Jis Ne Haq Karbala Mein Ada Kar Diya,
Apne Nana Ka Wada Wafa Kar Diya,
Sab Kuch Ummat Ki Khatir Fida Kar Diya,
Ghar Ka Ghar Hi Supurd-E-Khuda Kar Diya,
Us Husain Ibn-E-Haidar Pe Lakhon Salam
Mere Husain Tujhe Salam,
Mere Husain Tujhe Salam,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain
Kar Chuka Wo Habeb Apni Hujjat Tamam,
Le Ke Allah Aur Apne Nana Ka Naam,
Kofiyon Ko Sunae Khuda Ke Kalam,
Aur Fida Ho Gaya Shah-E-Aali-maqam,
Us Husain Ibn-E-Haidar Pe Lakhon Salam
Mere Husain Tujhe Salam,
Mere Husain Tujhe Salam
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain,
Assalaam Ya Husain
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यह करुणा, अगाध श्रद्धा और शोक की भावनाओं से ओतप्रोत एक अत्यंत विख्यात सलाम (मनक़बत) है। इसमें हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के बचपन के उच्च मर्तबे, उनके परिवार पर ढहाए गए अत्याचारों और कर्बला में इस्लाम की रक्षा के लिए दी गई महान शहादत को याद किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हम हज़रत अली के लाडले पुत्र इमाम हुसैन (अ.स.) पर लाखों सलाम भेजते हैं, जिन्होंने सत्य की रक्षा के लिए शहादत का प्याला खुशी-खुशी स्वीकार किया। उन्हें धोखे से कूफ़े बुलाकर सताया गया, उनके भाई (इमाम हसन) को ज़हर दिया गया और बच्चों को प्यासा रखा गया, फिर भी उन्होंने अपने नाना (मुहम्मद ﷺ) के वचन को निभाया और अपना पूरा परिवार ईश्वर के मार्ग में न्योछावर कर दिया।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| नोश करना | पीना / ग्रहण करना |
| इब्न-ए-हैदर | हैदर (हज़रत अली) के बेटे |
| जोड़ा | वस्त्र / पोशाक (यहाँ अर्थ जन्नत से आए कपड़ों से है) |
| दोश-ए-नबी | पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ का कंधा |
| सुपुर्द-ए-ख़ुदा | ईश्वर को सौंप देना / अल्लाह के हवाले करना |
| हुज्जत तमाम | अपनी बात पूरी करना / सत्य का प्रमाण अंतिम बार देना |
| शाह-ए-आली-मक़ाम | ऊंचे रूतबे या ऊंचे स्थान वाले बादशाह |
इस कलाम का मुख्य सार यह है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) का बचपन अत्यंत पावन था, जिनके लिए जन्नत से पोशाकें आती थीं और जो नबी ﷺ के कंधों की सवारी करते थे। कर्बला के तपते मैदान में अत्याचारियों ने उनकी गर्दन पर ख़ंजर चलाया और उनके पवित्र जिस्म को तीरों से छलनी कर दिया। इसके बावजूद, उन्होंने अंतिम क्षण तक कूफ़े के लोगों को अल्लाह का कलाम सुनाकर हिकमत का रास्ता दिखाया और पूरी उम्मत की भलाई के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाकर सत्य को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
लिरिक्स के मुताबिक, इमाम हुसैन (अ.स.) ने उम्मत की ख़ातिर अपना सब कुछ क़ुर्बान करके किसका वादा वफ़ा किया था?