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मेरा गदा मेरा मँगता मेरा ग़ुलाम आए Lyrics In हिन्दी

(मेरा गदा मेरा मँगता मेरा ग़ुलाम आए, ख़ुदा करे कभी तयबा से ये पयाम आए)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : मेरा गदा मेरा मँगता मेरा ग़ुलाम आए

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 28 Jul, 2023 04:07 PM IST

बार देखा गया : 202

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मेरा गदा, मेरा मँगता, मेरा ग़ुलाम आए,
ख़ुदा करे, कभी तयबा से ये पयाम आए

दुरूद-ए-सय्यिद-ए-कौनैन के वसीले से,
मेरी ज़ुबान पे, आक़ा ! तेरा ही नाम आए

मैं इस यक़ीन से आया हूँ उन के रौज़े से,
वो फिर कहेंगे कि वापस मेरा ग़ुलाम आए

मैं देखता ही रहूँ बस तुम्हारे रौज़े को,
जनाब-ए-ज़हरा के सदक़े में ऐसी शाम आए

ग़ुलाम-ए-ज़हरा हूँ, मैं तो 'अली का नौकर हूँ,
हमेशा पंज-तनी निस्बत ही मेरे काम आए

हसन हुसैन का देता हूँ वास्ता उन को,
फ़क़ीर-ए-आल-ए-मुहम्मद में मेरा नाम आए

हसन हुसैन का देता है वास्ता मिस्कीं,
फ़क़ीर-ए-आल-ए-मुहम्मद में मेरा नाम आए

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह मदीने की हाज़िरी की तड़प और अहले-बेत (पंजतन पाक) से गहरे आध्यात्मिक लगाव से भरपूर एक बेहद भावुक और मक़बूल नात-ए-पाक है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि शायर की सबसे बड़ी तमन्ना यह है कि काश! मदीने (तयबा) से नबी ﷺ का यह संदेश आ जाए कि "मेरा मँगता और ग़ुलाम आ रहा है।" शायर को पूरा भरोसा है कि जब वह नबी ﷺ के रौज़े से वापस लौटेगा, तो हुज़ूर ﷺ उसे फिर से हाज़िरी का बुलावा भेजेंगे।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
गदा / मँगताभिखारी / दर का सवाली
पयाम / पयामसंदेश / बुलावा
सय्यिद-ए-कौनैनदोनों जहानों के सरदार (नबी ﷺ)
वसीलामाध्यम / ज़रिया
रौज़ापवित्र मज़ार / हुज़ूर ﷺ का आशियाना
निस्बतआध्यात्मिक संबंध / जुड़ाव
मिस्कींलाचार/ग़रीब (यहाँ शायर का तख़ल्लुस/नाम भी है)

सारांश (Summary)

इस नात का मुख्य सार यह है कि एक मोमिन की दिली ख़्वाहिश हमेशा मदीने के दीदार और हुज़ूर ﷺ की ग़ुलामी में जीने की होती है। शायर हज़रत अली, सैयदा ज़हरा, इमाम हसन और इमाम हुसैन (अ.स.) का वास्ता देकर अल्लाह से दुआ करता है कि उसका नाम पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के पवित्र घराने (आल-ए-मुहम्मद) के सच्चे फ़क़ीरों में शामिल हो जाए। उसका दृढ़ विश्वास है कि पंजतन पाक से उसका यह रूहानी नाता (निस्बत) ही लोक और परलोक दोनों में उसकी मुक्ति का ज़रिया बनेगा।

लिरिक्स के मुताबिक, शायर नबी ﷺ के दरबार से दोबारा बुलावा पाने के लिए किन का वास्ता दे रहा है?

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