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मरहबा या मुस्तफ़ा निसार तेरी चहल पहल पे हज़ारों ईदें रबी उल अव्वल Lyrics In हिन्दी

(मरहबा या मुस्तफ़ा निसार तेरी चहल पहल पे हज़ारों ईदें रबी-उल-अव्वल, सिवाए इब्लिस के जहाँ में सभी तो ख़ुशियाँ मना रहे हैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : मरहबा या मुस्तफ़ा निसार तेरी चहल पहल पे हज़ारों ईदें रबी-उल-अव्वल

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: मिलाद रज़ा कादरी

जोड़ा गया : 19 Aug, 2023 10:30 AM IST

बार देखा गया : 2.5K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

नसीब चमके हैं फ़र्शियों के, कि अर्श के चाँद आ रहे हैं,
झलक से जिन की फ़लक है रौशन, वो शम्स तशरीफ़ ला रहे हैं

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

निसार तेरी चहल पहल पे हज़ारों ईदें रबी-उल-अव्वल,
सिवाए इब्लिस के जहाँ में सभी तो ख़ुशियाँ मना रहे हैं

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

शब-ए-विलादत में सब मुसलमाँ, न क्यूँ करें जान-ओ-माल क़ुर्बां,
अबू लहब जैसे सख़्त क़ाफ़िर ख़ुशी में जब फ़ैज़ पा रहे हैं

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

ज़माने भर में ये क़ाईदा है कि जिस का खाना उसी का गाना,
तो नेमतें जिन की खा रहे हैं, उन्हीं के हम गीत गा रहे हैं

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

जो क़ब्र में उन को अपनी पाऊँ, पकड़ के दामन मचल ही जाऊँ,
जो दिल में रह के छुपे थे मुझ से, वो आज जल्वा दिखा रहे हैं

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

मैं तेरे सदक़े ज़मीन-ए-तयबा, फ़िदा न हो तुझ पे क्यूँ ज़माना,
कि जिन की ख़ातिर बने ज़माने, वो तुझ में आराम पा रहे हैं

मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा,
मरहबा या मुस्तफ़ा, मरहबा या मुस्तफ़ा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की आमद के स्वागत और उनकी अज़मत का एक ख़ूबसूरत मंज़र है। इसमें बताया गया है कि नबी ﷺ के आने से धरती वालों की क़िस्मत जाग गई है और पूरी कायनात उनके नूर से जगमगा उठी है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि रबी-उल-अव्वल की खुशियाँ हज़ारों ईदों से बढ़कर हैं क्योंकि इस महीने में वह सूरज (शम्स) तशरीफ़ लाया जिससे आसमान रौशन है। शायर कहता है कि जब अबू लहब जैसे व्यक्ति को नबी ﷺ के जन्म की खुशी मनाने पर राहत मिल सकती है, तो एक सच्चे मोमिन के लिए यह जश्न कितना बरकत वाला होगा।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (हिंदी / English)
मरहबास्वागत / Welcome
फ़र्शियोंज़मीन वाले (लोग) / Inhabitants of Earth
निसारन्योछावर या क़ुर्बान / Sacrificed or Devoted
इब्लिसशैतान / Satan
फ़ैज़लाभ या कृपा / Blessing or Benefit
ज़मीन-ए-तयबामदीने की पाक ज़मीन / The pure land of Medina

सारांश (Summary)

हुज़ूर ﷺ के आने पर शैतान के अलावा पूरा संसार खुशी मना रहा है। शायर का मानना है कि हम नबी ﷺ के सदक़े ही अल्लाह की नेमतें पा रहे हैं, इसलिए उम्र भर उनकी प्रशंसा के गीत गाना हमारा कर्तव्य है। सबसे बड़ी अभिलाषा यह है कि मृत्यु के बाद क़ब्र में जब आक़ा ﷺ का दीदार हो, तो भक्त प्रेम में उनका दामन थाम ले।

नबी ﷺ की विलादत पर पूरे जहाँ में कौन खुशी नहीं मना रहा है, और शायर ने क़ब्र में क्या करने की तमन्ना की है?

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