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मरहबा बोलो मरहबा Lyrics In हिन्दी

(मरहबा बोलो मरहबा, झूम कर बोलो मरहबा मरहबा)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : मरहबा बोलो मरहबा

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 19 Aug, 2023 09:19 AM IST

बार देखा गया : 437

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

मुमिनो वक़्त-ए-अदब है,
आमद-ए-महबूब-ए-रब है,
जाए-अदब-ओ-तरब है,
आमद-ए-शाह-ए-अरब है

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

बज रहे हैं शादियाने,
बुत लगे कलिमा सुनाने,
हर ज़बान पर हैं तराने,
आमद-ए-शाह-ए-अरब है

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

अब्र-ए-रहमत छा गया है,
काबे पे झंडा गड़ा है,
बाब-ए-रहमत आज वा है,
आमद-ए-शाह-ए-अरब है

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

बादलियाँ रहमत की छाईं,
बूंदियाँ रहमत की आईं,
अब मुरादें दिल की पाईँ,
आमद-ए-शाह-ए-अरब है

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

आने वाला है वो प्यारा,
दोनों आलम का सहारा,
काबे का चमका सितारा,
आमद-ए-शाह-ए-अरब है

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

आमिना बीबी का जाया,
बारहवीं तारीख़ आया,
सुब्ह-ए-सादिक़ ने सुनाया,
सलवातुल्लाही अलैका

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

उठो, आया ताज वाला,
अर्श की आँखों का तारा,
सब कहो, ऐ माह-ए-तयबा,
सलवातुल्लाही अलैका

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

दीन का हो बोलबाला,
सुनियों का रुख़ उजाला,
दुश्मनों का मुँह हो काला,
सलवातुल्लाही अलैका

मरहबा, बोलो मरहबा मरहबा,
झूम कर बोलो मरहबा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की आमद के स्वागत और उस समय कायनात में छाई खुशी का एक रूहानी मंज़र पेश करती है। इसमें बताया गया है कि नबी ﷺ के आने से रहमत के दरवाज़े खुल गए और हर तरफ नूर छा गया।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि यह समय अत्यंत अदब और खुशी का है क्योंकि अल्लाह के महबूब और अरब के सुल्तान ﷺ तशरीफ़ ला रहे हैं। उनके आने की खुशी में काबे पर झंडा गाड़ा गया और जड़ बुत भी उनकी शान में कलिमा पढ़ने लगे, जिससे मुमिनों के दिलों की मुरादें पूरी हो गईं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (हिंदी / English)
शाह-ए-अरबअरब के सुल्तान (नबी ﷺ) / King of Arabia
तरबहर्ष या उल्लास / Joy or Delight
शादियानेखुशी के नगाड़े / Celebration drums
अब्र-ए-रहमतदया के बादल / Clouds of Mercy
बाब-ए-रहमतदया का दरवाज़ा / Door of Mercy
वाखुला हुआ / Open

सारांश (Summary)

हुज़ूर ﷺ रबी-उल-अव्वल की बारहवीं तारीख को 'काबे के सितारे' बनकर तशरीफ़ लाए, जिनके स्वागत में पूरी कायनात 'मरहबा' पुकार रही है। सुब्ह-ए-सादिक़ की वह घड़ी रहमतों की बारिश लेकर आई, जिसने न केवल बुतों को झुका दिया बल्कि दीन का बोलबाला भी कर दिया। शायर अंत में दुआ करता है कि आक़ा ﷺ के सदक़े मुमिनों के चेहरे हमेशा रोशन रहें।

नात के मुताबिक, काबे पर झंडा कब गाड़ा गया और उनकी आमद पर बुतों (मूर्तियों) का क्या हाल हुआ?

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