اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : मदीने से बुलावा आरहा है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 07 Sep, 2025 01:54 PM IST
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मदीने से बुलावा आरहा है,
मेरा दिल मुझसे पहले जा रहा है
यहाँ मर्जी नहीं चलती किसी की,
मदीने वाला ही बुलवा रहा है
मदीने से बुलावा आरहा है...
मेरा दिल भी तू अपने साथ लेजा ,
अकेला क्यूँ मदीने जा रहा है
मदीने से बुलावा आरहा है...
यह चक्की फातिमा की चल रही है,
ज़माना जितना लंगर खा रहा है
मदीने से बुलावा आरहा है...
नवासों का वो सदका बांटते है,
ज़माना उनका सदका खा रहा है
मदीने से बुलावा आरहा है,
मेरा दिल मुझसे पहले जा रहा है
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यह कलाम मदीना शरीफ की हाज़िरी की तड़प और वहाँ से मिलने वाली आध्यात्मिक कृपा (Rehmat) को बहुत ही भावुक अंदाज़ में पेश करता है। इसमें ज़िक्र है कि मदीना जाना अपनी इच्छा पर नहीं, बल्कि ईश्वरीय बुलावे पर निर्भर करता है।
कवि कहता है कि जब मदीना का बुलावा आता है, तो भक्त का हृदय शरीर के पहुँचने से पहले ही वहाँ पहुँच जाता है। यहाँ किसी की अपनी मर्ज़ी नहीं चलती; केवल वही मदीना जा सकता है जिसे स्वयं हुज़ूर ﷺ ने याद किया हो।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बुलावा | आमंत्रण (Invitation) |
| मर्ज़ी | इच्छा (Will) |
| चक्की | अनाज पीसने का यंत्र (यहाँ बीबी फातिमा की सादगी और मेहनत का प्रतीक है) |
| लंगर | मुफ़्त भोजन या ईश्वरीय कृपा |
| नवासों | बेटियों के बेटे (हज़रत हसन और हुसैन) |
| सदक़ा | दान या उनके नाम की बरकत |
इस नात का सार यह है कि पूरा संसार नबी ﷺ के परिवार (अहल-ए-बैत) के सदक़े और उनकी बरकतों से पल रहा है। कवि यह संदेश देता है कि मदीना का सफ़र रूहानी होता है और दुनिया को मिलने वाला रिज़क़ हज़रत फातिमा R.A की चक्की और उनके बेटों के सदक़े का ही परिणाम है।
"मेरा दिल मुझसे पहले जा रहा है"—क्या आपने कभी किसी पवित्र स्थान के लिए ऐसी रूहानी पुकार महसूस की है?