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मदीने की गलियाँ वो रोज़े की जाली Lyrics In हिन्दी

(मदीने की गलियाँ वो रोज़े की जाली, मदीने को देखूँ ये दिल कह रहा है)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : मदीने की गलियाँ वो रोज़े की जाली

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 22 Sep, 2024 01:26 PM IST

बार देखा गया : 721

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है,
बुला लो ऐ आक़ा, गुनहगार को भी,
मदीने को जाऊँ, ये दिल कह रहा है।

वो मस्जिदे-नबवी, वो मिंबर तुम्हारा,
जहाँ आपने है ख़ुत्बा सुनाया,
वो नूरानी मस्जिद, वो नूरानी मिंबर,
देखूँ मैं जाकर, ये दिल कह रहा है।

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है…

वो गुम्बद तुम्हारा, जो जन्नत बक़ी है,
वो नूरानी मंज़र, वो नूरानी क़ब्रें,
वो वादी का मंज़र, नज़ा में बसा के,
मैं देखूँ मदिना, ये दिल कह रहा है।

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है…

वहाँ की हवाओं में ख़ुशबू तुम्हारी,
वहाँ की फ़िज़ाओं में रंगत तुम्हारी,
वो नूरानी गलियों में नूर तुम्हारा,
वहाँ आ के देखूँ, ये दिल कह रहा है।

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है…

जन्नत बक़ी में, वो नूरानी क़ब्रें,
जहाँ से है आक़ा का रौज़ा चमक के,
क़दमों में आक़ा के इतना मज़ा है,
वहीं दफ़न होना, ये दिल कह रहा है।

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है…

गुनाहों में डूबा, ये आशिक़ तुम्हारा,
बड़ा बेख़बर है, बड़ा बेसहारा,
करम कीजिए फ़ैज़ पर भी ऐ आक़ा,
गुनाह बख्शवाऊँ, ये दिल कह रहा है।

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है…

गुनहगार हूँ मैं, ख़ता कर हूँ मैं,
ये दुनिया की बातों में डूबा हूँ मैं,
बचा लो ऐ आक़ा, इस दुनिया से मुझ को,
मुझे अब बुलाओ, ये दिल कह रहा है।

मदीने की गलियाँ, वो रोज़े की जाली,
मदीने को देखूँ, ये दिल कह रहा है…

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात एक विह्वल भक्त की पुकार है जो मदीना शरीफ़ की तीर्थयात्रा के लिए अत्यंत व्याकुल है। इसमें एक गुनहगार बंदे की अपने आक़ा ﷺ के दरबार में हाज़िरी और वहीं जीवन के अंत की पवित्र इच्छा का वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में शायर मदीना की गलियों, गुम्बद-ए-खिज़रा और जन्नत-उल-बक़ी के पवित्र दृश्यों को अपनी आँखों से देखने की आरज़ू कर रहा है। वह अपने गुनाहों की माफ़ी के लिए आक़ा ﷺ के करम का तलबगार है और चाहता है कि उसे दुनिया की मोह-माया से बचाकर मदीना बुला लिया जाए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
रोज़े की जालीहुज़ूर ﷺ की मज़ार के चारों ओर की पवित्र जालियाँ
ख़ुत्बाधार्मिक उपदेश
मिंबरमस्जिद में ऊँचा स्थान जहाँ से उपदेश दिया जाता है
जन्नत बक़ीमदीना का प्रसिद्ध और पवित्र कब्रिस्तान
फ़िज़ावातावरण या माहौल
ख़ता करगलतियाँ करने वाला या पापी

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि एक सच्चा आशिक़ दुनियावी दुखों और अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए केवल मदीना की शरण चाहता है। उसकी दिली तमन्ना है कि वह मदीना की नूरानी आब-ओ-हवा में साँस ले और अंततः वहीं की पाक मिट्टी (जन्नत-उल-बक़ी) में दफ़न होकर अमर हो जाए।

नात के आखिरी बंद (पद) में शायर ने खुद को दुनिया की बातों में डूबा हुआ बताकर आक़ा ﷺ से क्या इल्तेजा की है?

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