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किस लब पे क्या दुआ है सरकार जानते हैं Lyrics In हिन्दी

(किस लब पे क्या दुआ है सरकार जानते हैं, किस के दिलों में क्या है सरकार जानते हैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : किस लब पे क्या दुआ है सरकार जानते हैं

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 28 Dec, 2023 08:13 AM IST

बार देखा गया : 439

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

किस लब पे क्या दुआ है, सरकार जानते हैं
किस के दिलों में क्या है, सरकार जानते हैं

किस लब पे क्या सदा है, साइल के दिल में क्या है
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

मुर्दा है या कि ज़िंदा, बच्ची है या कि बच्चा
जो ग़ैब की खबर दे वो हैं हमारे आक़ा
किस को भला खबर है, मजबूर हर बशर है
माँ के शिकम में क्या है, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

शाख़-ए-खजूर लेकर क़ब्रों पे डालते हैं
मय्यत की हर सज़ा को पल भर में टालते हैं
मुर्दा है किस जगह का, इसका है माजरा क्या
क़ब्रों में हाल क्या है, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

मीराज का सफ़र है, सरकार जा रहे हैं
और ला-मकान पहुँचकर तशरीफ़ ला रहे हैं
मीराज की हक़ीक़त ईमान है ये अपना
परदे में क्या रखा है, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

सिद्रा पे ले के पहुँचे, जिब्रील साथ छोड़ें
मुझ को न कुछ पता है, कहते हैं हाथ जोड़ें
आगे, हज़ूर! जाएँ, ये मेरी इन्तिहा है
सिद्रा के आगे क्या है, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

कभी क़ाफ़ कह रहे हैं, कभी साद कह रहे हैं
कभी अइन कह रहे हैं, कभी हा पे रह रहे हैं
जिब्रील कह रहे हैं, ये राज़ की हैं बातें
माना मफ़हूम क्या है, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

शेशों के घर में रह कर पत्थर उछालते हैं
उश्शाक़-ए-मुस्तफ़ा तो तक़दीर टालते हैं
हाँ, मीर! रब है ख़ालिक़ और मुस्तफ़ा हैं मालिक
क़िस्मत में क्या लिखा है, सरकार जानते हैं

सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं
सरकार जानते हैं, सरकार जानते हैं

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह मनक़बत हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के इल्म और उनकी रूहानी अज़मत को समर्पित है, जिसमें बताया गया है कि अल्लाह ने अपने महबूब को वह मुकाम अता किया है कि वे दिलों के हाल और कायनात के छिपे हुए राज़ जानते हैं।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ हर माँगने वाले की पुकार और उसके दिल की तड़प से वाक़िफ़ हैं। शायर कहता है कि चाहे वह माँ के पेट में पल रहा बच्चा हो, क़ब्र में मैयत का हाल हो, या मेराज की वह ऊँचाइयाँ जहाँ जिब्रील (अ.स.) की भी पहुँच नहीं थी—इन सब हकीक़तों का इल्म अल्लाह के हुक्म से सरकार ﷺ को है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
सदाआवाज़ या पुकार
साइलमाँगने वाला (भिक्षुक)
ग़ैबपरोक्ष या छिपा हुआ (अदृश्य)
बशरमनुष्य या इंसान
शिकमपेट या गर्भ
ला-मकानवह स्थान जो स्थान और समय से परे हो
सिद्रामेराज के सफ़र की वह सीमा (बेरी का पेड़) जहाँ फ़रिश्तों की पहुँच खत्म हो जाती है
मफ़हूमअर्थ या मतलब
उश्शाक़प्रेमी (इश्क़ करने वाले)

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि अल्लाह के रसूल ﷺ की हस्ती को समस्त सृष्टि का ज्ञान (इल्म) दिया गया है। शायर ने मेराज के सफ़र और क़ुरान के रहस्यमयी अक्षरों (हुरूफ़-ए-मुक़त्ताअत) का ज़िक्र करके यह समझाया है कि जहाँ इंसानी अक्ल और फ़रिश्तों के पर जलते हैं, वहाँ भी हुज़ूर ﷺ की रसाई है। अंत में यह संदेश दिया गया है कि मुस्तफ़ा ﷺ के सच्चे प्रेमी अपनी तक़दीर और क़िस्मत के लिए केवल उन्हीं की रहमत पर भरोसा रखते हैं।

शायर ने मेराज के वक्त हज़रत जिब्रील (अ.स.) की "इन्तिहा" और "सिदरा" के आगे का ज़िक्र क्यों किया है?

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