मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Kehdo Kehdo Machal Ke Subhanallah
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 13 Feb, 2024 08:12 AM IST
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कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह,
हाथ उठा करके कहदो मचल के सुभानल्लाह,
हाथ उठा कर कहदो सुभानल्लाह,
सारे मिल कर के बोलो सुभानल्लाह,
मैं पढ़ूँ नात ए पाक ए रसूल अल्लाह (स.अ.)
कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह
या इलाही हो मेरी दुआ ये कबूल,
या इलाही हो सबकी दुआ ये कबूल,
हम भी बन जायेंगे आका के कदमों की धूल,
जब मरे तो ज़बान पे हो इलल लाह
कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह
एक हिरनी को जिस दम लिया था फसा,
फ़ज़ले हक़ फ़ैज़ से हो गई वो रिहा,
जब कहा अलमदद या रसूल अल्लाह (स.अ.)
कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह
लेलहाने लगे हर तरफ़ खेतियाँ,
कोई भूखा रहेगा ना प्यासा यहाँ,
आगये अब जहाँ में हबीब उल्लाह (स.अ.)
कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह
हम भी जाएंगे फिर काबिल ए एहतराम,
हमको मिल जाए जन्नत में आला मकाम,
नात सुनके वो कह दे ज़्ज़ाकल्लाह
कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह
गौस ए आज़म ने सज्जाद ऐसा किया,
एक इशारे से मुर्दे को जिंदा किया,
सिर्फ इतना कहा कुमबे इज़नील्लाह ,
कहदो कहदो मचल के सुभानल्लाह,
बोलो बोलो मचल के सुभानल्लाह