मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अल्लामा निसार अली उजागर
नातख्वान/कलाकार: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
जोड़ा गया : 19 Aug, 2023 10:03 AM IST
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मरहबा मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा,
मरहबा मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
जश्न-ए-विलादत की रौनक़ पे यारो,
मरते हैं सुन्नी, मरते रहेंगे,
अपने नबी की अज़मत का चर्चा,
करते हैं सुन्नी, करते रहेंगे
कुछ जलने वाले देख के कहते हैं हमेशा,
सरकार की आमद पे लगाते हो क्यूँ पैसा,
ये पैसा तो क्या चीज़ है, हम घर भी लुटा दें,
कोई नहीं जहान में सरकार के जैसा
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
मेरे सरकार आए, मेरे दिलदार आए,
मेरे सरकार आए, मेरे दिलदार आए
मेरे नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा,
प्यारे नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा,
लजपाल नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा,
ग़म-ख़्वार नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा
साहिब-ए-मेराज नबी,
आसियों की लाज नबी,
नबियों के सरताज नबी,
कल भी थे और आज नबी,
दो जहाँ के राज वाले मेरे नबी आ गए
हर ख़ारजी फ़सादी वतन से भगाएँगे,
पढ़ के दुरूद सब को मीलादी बनाएँगे,
लाएँगे हम हुज़ूर का इस्लाम तख़्त पर,
ला-दीनियत के सारे बुतों को गिराएँगे
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
तकलीफ़ होती है, तुझे मिर्चें भी लगती हैं,
जब बारहवीं पे लाइटों से गलियाँ भी सजती हैं,
क्यूँ चिढ़ता है तू देख के झंडों की बहारें,
ता'ज़ीम-ए-नबी हो तो सभी अच्छी लगती हैं,
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
लालच न दो, हम नाम-ए-मुहम्मद पे मरेंगे,
मीलाद पे समझौता किया है न करेंगे,
बर्दाश्त न करेंगे जुलूसों पे रुकावट,
मीलाद-ए-मुहम्मद का मिशन जारी रखेंगे
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
तेरा खावाँ, मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह,
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावाँ, या रसूलल्लाह
तालीम पहले दूँगा मुहम्मद के जश्न की,
तहज़ीब सिखाऊँगा मुहम्मद के जश्न की,
विर्से मे छोड़ जाऊँगा मीलाद की लगन,
मेरे भी बच्चे जश्न-ए-विलादत मनाएँगे
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
मेरे नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा,
प्यारे नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा,
लजपाल नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा,
ग़म-ख़्वार नबी आ गए, मरहबा या मुस्तफ़ा
हम अपनी मोहब्बत का यूँ ऐलान करेंगे,
हम जश्न-ए-मुहम्मद पे फ़िदा जान करेंगे,
मीलाद की रैलि-ओ-जुलूसों में ले जा कर,
औलाद भी सरकार पे क़ुर्बान करेंगे
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
क़ीमत जहाँ में अपनी, उजागर, गिराओगे,
आक़ा को छोड़ कर कभी इज़्ज़त न पाओगे,
मज़बूत कर लो रिश्ता नबी से तो जियोगे,
रिश्ता नबी से तोड़ोगे तो टूट जाओगे
हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे,
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे
साहिब-ए-मेराज नबी,
आसियों की लाज नबी,
नबियों के सरताज नबी,
कल भी थे और आज नबी,
दो जहाँ के राज वाले मेरे नबी आ गए
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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ के प्रति अटूट प्रेम और गर्व के साथ उनका मीलाद (जन्मदिवस) मनाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि नबी ﷺ की अज़मत का प्रचार करना ही एक मोमिन के जीवन का असली मिशन है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि आक़ा ﷺ की आमद पर पैसा या घर लुटाना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि उनके जैसा पूरी कायनात में कोई दूसरा नहीं है। शायर कहता है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी विरासत में मीलाद की लगन देकर जाएँगे ताकि यह जश्न हमेशा जारी रहे।
| शब्द | अर्थ (हिंदी / English) |
|---|---|
| अज़मत | महिमा या बड़प्पन / Grandeur |
| लजपाल | सम्मान की रक्षा करने वाले / Honorable |
| आसियों | गुनहगारों / Sinners |
| ता'ज़ीम | आदर या सम्मान / Respect |
| विर्से | विरासत / Inheritance |
| ग़म-ख़्वार | दुख बाँटने वाला / Sympathizer |
नबी ﷺ की मोहब्बत में गलियाँ सजाना और जुलूस निकालना आशिकों का तरीक़ा है। शायर 'उजागर' चेतावनी देते हैं कि जो व्यक्ति नबी ﷺ से अपना रिश्ता तोड़ लेता है, वह दुनिया में अपनी इज़्ज़त खो देता है। अतः, हर विरोध के बावजूद मीलाद का मिशन जारी रखना और अपनी औलाद को भी इसी राह पर चलाना ही सच्चा प्रेम है।
शायर के मुताबिक, इज़्ज़त पाने के लिए हमारा रिश्ता किसके साथ मज़बूत होना चाहिए, और शायर ने 'विर्से' (विरासत) में क्या छोड़ने की बात कही है?