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हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह Lyrics In हिन्दी

(हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह, नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 09 Apr, 2023 10:32 AM IST

बार देखा गया : 751

Time to read: 3 min read

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हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह

तेरे सादके में आका सारे जहाँ को दीन मिला
बेदीनो ने कलमा पढ़ा, ला इलाहा इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह

सिम्त-ए-नबी अबू जहल गया आका से उसने ये कहा
अगर हो नबी बतााओ ज़रा, मेरी मुठ्ठी में है क्या

आका का फ़रमान हुआ और फ़ज़ल-ए-रहमान हुआ
मुठ्ठी से पत्थर बोला, ला इलाहा इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह

वो जो बिलाल-ए-हाबशी है, सरवर-ए-दीं का प्यारा है
दुनिया के हर आशिक की आखों का वो तारा है

ज़ुल्म हुए कितने उसपर सीने पर रखा पत्थर
लब पर फिर भी जारी था, ला इलाहा इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह

अपनी बहन से बोले उमर (र.अ) ये तो बता क्या करती थी
मेरे आने से पहले क्या चुपके चुपके पढ़ती थी

बहन ने जब कुरआन पढ़ा, सुनके कलाम-ए-पाक खुदा
दिल ये उमर (र.अ) का बोल उठा, ला इलाहा इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह

दुनिया के इंसान सभी Shirk-o-bid'at करते थे
रब के थे बंदे फिर भी बू़त की इबादत करते थे

बूतखाने हैं थर्राये मेरे नबी हैं जब आए
कहने लगी मक़लूक-ए-ख़ुदा, ला इलाहा इल्लल्लाह

हस्बी रब्बी जलल्लाह, मा फी क़लबी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम अल्लाह की बड़ाई (तौहीद), हुज़ूर ﷺ के नूर और इस्लाम की हक़ीक़त का ख़ूबसूरत बयान है। इसमें बताया गया है कि सच्चा माबूद सिर्फ अल्लाह है और उसके प्यारे रसूल ﷺ के सदके ही पूरी दुनिया को हिदायत (सही रास्ता) नसीब हुई है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि मेरे लिए मेरा रब (अल्लाह) ही काफ़ी है और मेरे दिल में उसके सिवा किसी और की जगह नहीं है। हुज़ूर ﷺ के आने से दुनिया से कुफ़्र और शिर्क का ख़ात्मा हुआ, अबू जहल की मुट्ठी के पत्थरों ने गवाही दी, हज़रत बिलाल ने ज़ुल्म सहकर भी अल्लाह की एकता का इक़रार किया और हज़रत उमर (र.अ) ने क़ुरआन की आयतें सुनकर इस्लाम क़बूल किया।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
हस्बी रब्बीमेरे लिए मेरा रब ही काफ़ी है
जलल्लाहअल्लाह की शान बहुत बुलंद है
मा फी क़लबीमेरे दिल में कुछ नहीं है
ग़ैरुल्लाहअल्लाह के सिवा कोई और
सिम्त-ए-नबीनबी ﷺ की तरफ / नबी की दिशा में
फ़ज़ल-ए-रहमानदयालु ईश्वर (अल्लाह) की कृपा
सरवर-ए-दींदीन के सरदार (हुज़ूर ﷺ)
मक़्लूक-ए-ख़ुदाईश्वर की बनाई हुई पूरी सृष्टि / जनता

सारांश (Summary)

इस नात में इस्लाम के इतिहास की अहम घटनाओं के ज़रिए तौहीद (एकता) का संदेश दिया गया है। जब पूरी दुनिया बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) और अज्ञानता में डूबी थी, तब नबी ﷺ के आने से अंधकार दूर हुआ। हज़रत बिलाल (र.अ) के सब्र और हज़रत उमर (र.अ) के दिल के बदलने के वाक़िए से यह साफ़ होता है कि सच्चा ईमान हर ज़ुल्म और रूढ़िवादी सोच पर हमेशा भारी पड़ता है।

अबू जेहल के सवाल पर हुज़ूर ﷺ के किस मोज़िज़े (चमत्कार) से पत्थरों ने कलमा पढ़ा, और हज़रत बिलाल (र.अ) ने किस हाल में 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहा?

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