मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : हर ज़माना मेरे हुसैन का है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 29 Jul, 2023 11:01 AM IST
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हक़ निभाना मेरे हुसैन का है,
हर ज़माना मेरे हुसैन का है।
जिस जगह हुर बनाए जाते हैं,
कारख़ाना मेरे हुसैन का है।
हर ज़माना मेरे हुसैन का है।
जिसकी ख़ातिर ये कायनात बनी,
ऐसा नाना मेरे हुसैन का है।
हर ज़माना मेरे हुसैन का है।
ये जो काबा है तुम न समझोगे,
घर पुराना मेरे हुसैन का है।
हर ज़माना मेरे हुसैन का है।
तुम जिसे आसमान समझते हो,
शामियाना मेरे हुसैन का है।
मेरे घर में चराग़ जलते हैं,
आना जाना मेरे हुसैन का है।
हर ज़माना मेरे हुसैन का है।
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यह शौर्य और अगाध श्रद्धा से भरपूर बेहद खूबसूरत मनक़बत (इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में) हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के रूहानी मर्तबे, उनकी कर्बला की अज़ीम क़ुर्बानी और पूरी कायनात पर उनके अधिकार को दर्शाती है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि सत्य और धर्म का साथ कैसे निभाया जाता है, यह इतिहास में केवल मेरे हुसैन (अ.स.) ने ही सिद्ध किया है; इसलिए हर दौर और हर ज़माना उन्हीं का है। शायर कहता है कि जिस पवित्र स्थान पर लोगों की तक़दीर बदलकर उन्हें ग़ुलामी से 'हुर' (आज़ाद और सम्मानित) बनाया जाता है, वह कारख़ाना मेरे हुसैन (अ.स.) का ही दरबारी आशियाना है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| हक़ निभाना | सत्य का साथ देना / धर्म का पालन करना |
| हुर | आज़ाद/नेक इंसान (यहाँ कर्बला के शहीद हज़रत हुर की तरफ़ भी इशारा है) |
| कारख़ाना | केंद्र / निर्माण का स्थान |
| कायनात | सृष्टि / ब्रह्मांड या पूरी दुनिया |
| नाना | माता के पिता (यहाँ अर्थ पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ से है) |
| शामियाना | टेंट / छतरी या बड़ा पर्दा |
| चराग़ | दीपक / रोशनी (यहाँ अर्थ ईमान की रोशनी से है) |
इस मनक़बत का मुख्य सार यह है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) का मर्तबा इस पूरी सृष्टि में सबसे बुलंद है, क्योंकि जिसके सदक़े में यह दुनिया बनी (यानी हज़रत मुहम्मद ﷺ), वह उनके सगे नाना हैं। शायर श्रद्धा भाव में कहता है कि जिसे लोग आसमान समझते हैं, वह तो हुसैन (अ.स.) के महल का महज़ एक शामियाना है और काबा भी उनका पुराना घर है क्योंकि उनके परिवार (अह्ले-बेत) ने ही उसकी गरिमा को बचाया है। अंत में वह गर्व से कहता है कि मेरे घर में आज जो भी खुशहाली और ईमान के चराग़ रोशन हैं, वह सब मेरे मौला हुसैन (अ.स.) की रूहानी आमद और कृपा का नतीजा है।
लिरिक्स के मुताबिक, जिस आसमान को हम देखते हैं, उसे शायर ने हुसैन (अ.स.) का क्या बताया है?