रुख़ दिन है या महर-ए-समा ये भी नहीं वो भी नहीं
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टाइटल : Hajiyo Aao Shahenshah Ka Roza Dekho
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : कलामे आलाहज़रत (इमाम अहमद रज़ा)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 07 Jan, 2023 01:13 PM IST
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हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो,
हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो,
काबा तो देख चुके काबे का काबा देखो
आबे ज़म ज़म तो पिया खूब भुजाई प्यासे,
आबे ज़म ज़म तो पिया खूब भुजाई प्यासे,
आओ जूदे शाह-ए-कौसर का भी जलवा देखो
हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो
खूब आंखो से लगाया गिलफ़े काबा,
खूब आंखो से लगाया गिलफ़े काबा,
कसरे महबूब के परदे का भी जलवा देखो
हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो
ज़ीनते काबा मे था लाख उरुसो का बनाओ,
ज़ीनते काबा मे था लाख उरुसो का बनाओ,
जलवा फरमा यहा कौनेन का दूल्हा देखो
हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो
ज़ेरे मिज़ाब मिले खून कर्म के छींटे,
ज़ेरे मिज़ाब मिले खून कर्म के छींटे,
आबरे रहमत का यहा जोर बरसना देखो
हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो
गौर से सुन तो रज़ा काबे से आती है सदा,
गौर से सुन तो रज़ा काबे से आती है सदा,
मेरी आँखों से मेरे प्यारे का रोज़ा देखो
हाजियों आओ शाहेनशाह का रोज़ा देखो
काबा तो देख चुके काबे का काबा देखो