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हाल ए दिल किस को सुनाएँ आप के होते हुए Lyrics In हिन्दी

(हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ आप के होते हुए, क्यूँ किसी के दर पे जाएँ आप के होते हुए)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ आप के होते हुए

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : सैय्यद अल्ताफ शाह काज़मी

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 18 Apr, 2023 09:42 PM IST

बार देखा गया : 1.7K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए
क्यूँ किसी के दर पे जाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

मैं ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हूँ, ये मेरी पहचान है
ग़म मुझे क्यूँ-कर सताएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

अपना जीना, अपना मरना अब इसी चौखट पे है
हम कहाँ, सरकार! जाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

कह रहा है आप का रब 'अन्त फ़ीहिम' आप से
क्यूँ इन्हें मैं दूँ सज़ाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

सामने है, ए अली के लाल! उस्वा आप का
क्यूँ किसी का ख़ौफ़ खाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

मैं ये कैसे मान जाऊँ! शाम के दरबार में
छीन ले कोई रिदाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

ये तो हो सकता नहीं! ये बात मुमकिन ही नहीं!
मेरे घर आलाम आएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

कौन है, अल्ताफ़! अपना हाल-ए-दिल जिस से कहें
ज़ख़्म-ए-दिल किस को दिखाएँ, आप के होते हुए

हाल-ए-दिल किस को सुनाएँ, आप के होते हुए

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नबी करीम ﷺ और अहले बैत (पाक घराने) की बारगाह में पूर्ण विश्वास और असीम अक़ीदत से भरा हुआ एक बेहद भावुक और लोकप्रिय सूफ़ियाना कलाम है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब हमारे पास आप (हज़रत मुहम्मद ﷺ) जैसा महान और कृपालु सहारा मौजूद है, तो हम अपने दिल की व्यथा किसी और को क्यों सुनाएँ और किसी दूसरे के दर पर भीख माँगने क्यों जाएँ। कवि गर्व से कहता है कि पैग़ंबर का ग़ुलाम होना ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है, जिसके रहते दुनिया का कोई भी ग़म उसे डरा या सता नहीं सकता।


शब्द-अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
हाल-ए-दिलदिल की दशा / मन की बात
क्यूँ-करभला कैसे / किस तरह
अन्त फ़ीहिम (Ant Feehim)क़ुरान की आयत का अंश जिसका अर्थ है: "आप उनमें (मौजूद) हैं"
उस्वाआदर्श / आचरण या जीवन शैली
रिदाएँचादरें या दुपट्टे (पवित्र स्त्रियों के परदे के प्रतीक)
आलामदुःख, कष्ट या मुसीबतें (अल्म का बहुवचन)
अल्ताफ़कवि का उपनाम (तख़ल्लुस)

सारांश (Summary)

इस कलाम का मुख्य सार यह है कि एक सच्चे भक्त को अपने आक़ा ﷺ के संरक्षण पर इतना दृढ़ भरोसा है कि वह उनके होते हुए किसी भी संकट की कल्पना नहीं कर सकता। कवि ईश्वर के उस वादे को याद करता है जहाँ अल्लाह ने फ़रमाया कि आपकी उपस्थिति में वह कौम पर अज़ाब (सज़ा) नहीं देगा, और इसी भरोसे के साथ वह 'अली के लाल' (इमाम हुसैन) के आदर्शों पर चलकर हर भय से मुक्त हो जाता है। अंत में, शाम के दरबार और कर्बला की त्रासदियों पर भावुक हैरानी जताते हुए कवि 'अल्ताफ़' स्वीकार करता है कि जीवन-मरण अब इसी पवित्र चौखट से जुड़ा है, और वही उनके हर ज़ख़्म का एकमात्र मरहम है।

लिरिक्स के मुताबिक, शायर 'ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा' होने को अपनी क्या बताता है?

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