मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : गली गली सज गई शहर शहर सज गय
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अल्लामा निसार अली उजागर
नातख्वान/कलाकार: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
जोड़ा गया : 22 Sep, 2023 06:20 AM IST
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गली गली सज गई, शहर शहर सज गया
आए नबी, प्यारे नबी, मेरा भी घर सज गया
मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मुस्तफ़ा से प्यार है, दिल से ये इक़रार है
हर कोई मीलाद-ए-नबी करने को तय्यार है
मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
झंडे लगाओ ! घर को सजाओ !
कर के चराग़ाँ ख़ुशियाँ मनाओ !
'आशिक़ ने मदनी लाइटों से घर जगमगा दिया
ये जश्न ज़रूरी है सभी को बता दिया
मुन्किर ! ये तेरा बुग़्ज़ है मीलाद-ए-नबी से
जो सारा साल जलता था वो भी बुझा दिया
गली गली सज गई, शहर शहर सज गया
आए नबी, प्यारे नबी, मेरा भी घर सज गया
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
का'बे के बदरुद्दुजा ! तुम पे करोड़ों दुरूद
तयबा के शम्सुद्दुहा 1 तुम पे करोड़ों दुरूद
शाफ़े'-ए़-रोज़-ए-जज़ा ! तुम पे करोड़ों दुरूद
दाफ़े'-ए़-जुम्ला-बला ! तुम पे करोड़ों दुरूद
और कोई ग़ैब क्या तुम से निहाँ हो भला
जब न ख़ुदा ही छुपा तुम पे करोड़ों दुरूद
काम वो ले लीजिए, तुम को जो राज़ी करे
ठीक हो नाम-ए-रज़ा, तुम पे करोड़ों दुरूद
सरकार के मीलाद पे क्यूँ ए'तिराज़ है
ये बात ख़ुशी की है और तू नाराज़ है
लगता है तेरी दाल में काला ज़रूर है
मीलाद मनाने पे हमें दिल से नाज़ है
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
सरकार आए ! मरहबा !
दिलदार आए ! मरहबा !
मनठार आए ! मेरे लज-पाल आए !
क़ुरआँ के बताए हुए रस्ते पे रहेंगे
असहाब-ए-मुहम्मद के तरीक़े पे चलेंगे
मुमकिन ही नहीं ! कम हो कभी प्यार के जज़्बे
मीलाद-ए-नबी पहले से भी ज़्यादा करेंगे
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
शान-ए-रसूल-ए-पाक सुनाते ही रहेंगे
लब पर दुरूद-ए-पाक सजाते ही रहेंगे
जो मानते नहीं है, हमें उन से ग़रज़ क्या
हम लोग तो मीलाद मनाते ही रहेंगे
गली गली सज गई, शहर शहर सज गया
आए नबी, प्यारे नबी, मेरा भी घर सज गया
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आई नई हुकूमत, सिक्का नया चलेगा
'आलम ने रंग बदला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
दिल जगमगा रहे हैं, क़िस्मत चमक उठी है
फैला नया उजाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
ये बिगड़े हुए लोग सुधर क्यूँ नहीं जाते
'उश्शाक़ समंदर में उतर क्यूँ नहीं जाते
गुस्ताख़ों की करते हैं यहाँ जो भी हिमायत
सरकार के ग़द्दार हैं ये मर क्यूँ नहीं जाते
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
सरकार आए ! मरहबा !
दिलदार आए ! मरहबा !
मनठार आए ! मेरे लज-पाल आए !
ख़ुद अपने ही हाथों से यूँ तक़दीर जगा लो
हालात सँवर जाएँगे, झंडों को उठा लो
ईमान है और ख़ैर है मीलाद, उजागर !
क्यूँ बैठे हो, सरकार का मीलाद मना लो
गली गली सज गई, शहर शहर सज गया
आए नबी, प्यारे नबी, मेरा भी घर सज गया
मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मुस्तफ़ा से प्यार है, दिल से ये इक़रार है
हर कोई मीलाद-ए-नबी करने को तय्यार है
मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
दुनिया में जहाँ भी रहें, आबाद रहेंगे
जो आमिना के लाल का मीलाद करेंगे
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
मीलाद करेंगे ! मीलाद करेंगे !
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यह नात नबी-ए-करीम ﷺ की विलादत (जन्म) की खुशी और जश्न-ए-ईद-मीलादुन्नबी का एक जोश भरा बयान है, जिसमें आशिक़ों की दीवानगी और सुन्नते-रसूल पर चलने के जज्बे को दिखाया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ की आमद से पूरी दुनिया और मोमिनों के घर नूर से भर गए हैं। शायर कहता है कि मीलाद मनाना महज़ एक रस्म नहीं बल्कि ईमान और बरकत का ज़रिया है, जिससे इंसान की तक़दीर और हालात संवर जाते हैं।
| शब्द (word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| चराग़ाँ | दीप जलाना / रौशनी करना (Illumination) |
| बुग़्ज़ | द्वेष / दिल की जलन (Hatred/Malice) |
| बदरुद्दुजा | अंधेरे का पूर्ण चंद्रमा (Full Moon of Darkness) |
| शम्सुद्दुहा | दोपहर का चमकता सूरज (Bright Morning Sun) |
| शाफ़े'-ए़-रोज़-ए-जज़ा | क़यामत के दिन शफ़ात करने वाला (Intercessor on Judgment Day) |
| निहाँ | छुपा हुआ (Hidden) |
| ग़रज़ | मतलब या सरोकार (Concern/Need) |
इस नात का सार यह है कि नबी ﷺ से सच्ची मोहब्बत का सबूत उनका जश्न मनाना और उनके बताए हुए नेक रास्ते पर चलना है। इसमें विरोध करने वालों को जवाब देते हुए यह पैग़ाम दिया गया है कि हुज़ूर ﷺ की शान बयान करने और दुरूद-ओ-सलाम पढ़ने से ही दुनिया और आख़िरत में कामयाबी मुमकिन है।
इस नात में 'आमिना के लाल' का मिलाद मनाने वालों के लिए क्या दुआ दी गई है?