मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Delhi Rajasthan Tumhara Ya Khwaja
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 09 Apr, 2023 09:15 AM IST
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Delhi Rajasthan Tumhara Ya Khwaja
Sara Hindustan Tumhara Ya Khwaja
Hind Mein Navve(90) Lakh Ko Kalma Padhwaya
Hum Par Hai Ehsaan Tumhara Ya Khwaja
Sara Ana Sagar Kuze Mein Bhar Aaya
Sunte Hi Farman Tumhara Ya Khwaja
Aap Pe Hai Faizan Janab E Usman Ka
Hum Par Hai Faizan Tumhara Ya Khwaja
Faiz E Madina Milta Hai Ajmer Se Hi
Roza Hai Zeeshan Tumhara Ya Khwaja
Rahe Sunni Dawat E Islami
Ye To Hai Faizan Tumhara Ya Khwaja
In Dono Par Khas Karam Tum Farmana
Ahad Aur Riathuddin Tumhara Ya Khwaja
Syed Ko Taibah Ki Galiya Dikhla Do
Hai Adnaa Darban Tumhara Ya Khwaja
Delhi Rajasthan Tumhara Ya Khwaja
Sara Hindustan Tumhara Ya Khwaja
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यह मनक़बत सुल्तान-उल-हिंद हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (र.अ) की अज़मत (महिमा) और उनकी रूहानियत का बयान है। इसमें बताया गया है कि दिल्ली और राजस्थान समेत पूरे हिंदुस्तान पर उन्हीं की विलायत (आत्मिक हुकूमत) है और उन्हीं के सदके इस सरज़मीन पर इस्लाम का नूर फैला है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (र.अ) का पूरे हिंदुस्तान पर महान एहसान है क्योंकि उन्होंने यहाँ नब्बे लाख लोगों को कलमा पढ़वाकर ईमान की दौलत दी। शायर कहता है कि उनकी रूहानी ताक़त का यह आलम था कि उनके एक फ़रमान पर अजमेर की पूरी 'अना सागर' झील एक छोटे से कूज़े (मटके) में समा गई थी, और उनका रौज़ा इतना आलीशान है जहाँ से आज भी लोगों को मदीने का फ़ैज़ मिलता है।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| कूज़े | मिट्टी का छोटा पात्र / मटका या कुल्हड़ |
| फ़रमान | आदेश / हुक्म |
| फ़ैज़ान / फ़ैज़ | रूहानी कृपा / आशीर्वाद या लाभ |
| जनाब-ए-उस्मान | ख़्वाजा उस्मान हारूनी (र.अ) (ख़्वाजा पिया के पीर/गुरु) |
| ज़ीशान | बड़ी शान व शौकत वाला / वैभवशाली |
| तैबा | मदीना मुनव्वरा का एक पवित्र नाम |
| अदना | छोटा / तुच्छ या मामूली |
| दरबान | द्वारपाल / चौखट का पहरेदार |
ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (र.अ) ने अपने पीर-ओ-मुर्शिक हज़रत ख़्वाजा उस्मान हारूनी के आशीर्वाद से हिंदुस्तान में अमन और दीन का पैग़ाम फैलाया। शायर कहते हैं कि अजमेर शरीफ़ ही वह पवित्र दरबार है जहाँ से मदीना मुनव्वरा की बरकतें बंटती हैं। वे ख़्वाजा पिया से सुन्नी दावत-ए-इस्लामी की सलामती और अपने चाहने वालों पर ख़ास करम व मदीने की ज़ियारत कराने की दुआ करते हैं।
ख्वाजा गरीब नवाज़ (र.अ) ने हिंदुस्तान में कितने लाख लोगों को कलमा पढ़वाया था, और उनका पीर-ओ-मुर्शिक से क्या रिश्ता था?