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छोड़ कर अब तेरा आसताना करबला जा रहा हूँ मैं नाना Lyrics In हिन्दी

(छोड़ कर अब तेरा आसताना करबला जा रहा हूँ मैं नाना, राहे हक में है गर्दन कटाना करबला जा रहा हूँ मैं नाना)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : छोड़ कर अब तेरा आसताना करबला जा रहा हूँ मैं नाना

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी

नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी

जोड़ा गया : 12 Oct, 2022 08:22 AM IST

बार देखा गया : 9K

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

छोड़ कर अब तेरा आसताना,
करबला जा रहा हूँ मैं नाना

राहे हक में है गर्दन कटाना,
करबला जा रहा हूँ मैं नाना

सर हथेली पर ले कर चले हैं,
भूके प्यासे बहत्तर (72) चले हैं,
हशर में आबे कौसर पिलाना,
करबला जा रहा हूँ मैं नाना

एक ऐसा मैं सजदा करूंगा,
हशर तक जिसको पूरा करूंगा,
सर कयामत के दिन है उठाना,
करबला जा रहा हूँ मैं नाना

हर यजीदी को आया पसीना,
जब दिखाया है असगर ने सीना,
हिल गया है यजीदी घराना,
करबला जा रहा हूँ मैं नाना

कह रहा है यह पूरा घराना,
करबला जा रहा हूँ मैं नाना

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) द्वारा मदीना मुनव्वरा छोड़ते समय अपने नाना हुज़ूर पाक ﷺ के रौज़े पर अंतिम विदाई देने और सत्य (हक़) की रक्षा के लिए कर्बला के मैदान में दी जाने वाली महान क़ुर्बानी का एक अत्यंत भावुक और श्रद्धापूर्ण वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि इमाम हुसैन (र.अ.) अपने नाना से विदा लेकर कर्बला की ओर जा रहे हैं, जहाँ उन्हें सत्य की राह में अपनी गर्दन कटानी है। वे अपने साथ ७२ भूखे-प्यासे जाँबाज़ों को लेकर निकले हैं और अपने नाना से वादा करते हैं कि वे कर्बला की तपती रेत पर एक ऐसा ऐतिहासिक सजदा करेंगे जो प्रलय (क़यामत) तक याद रखा जाएगा।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
आसतानाचौखट / पवित्र दरब़ार या रौज़ा
राहे हक़सत्य और धर्म का मार्ग
हशरप्रलय का दिन / क़यामत (न्याय का दिन)
आबे कौसरजन्नत की पवित्र नदी 'कौसर' का जल
सजदाईश्वर के सामने सिर झुकाना / इबादत
असग़रहज़रत अली असग़र (इमाम हुसैन के ६ महीने के मासूम पुत्र)

सारांश (Summary)

इमाम हुसैन (र.अ.) अपने नाना के इस्लाम धर्म को बचाने के लिए अपने ७२ साथियों के साथ अपनी जान हथेली पर रखकर कर्बला के युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। इस सफर में उनका पूरा परिवार उनके साथ है। कवि कहता है कि जब ६ महीने के नन्हे अली असग़र ने भी ज़ालिमों के तीर के सामने अपना मासूम सीना तान दिया, तो अत्याचारी यज़ीद का पूरा साम्राज्य और उसका घराना भय से काँप उठा।

शायर के अनुसार, हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) मैदान-ए-कर्बला में खुदा के हुज़ूर कैसा 'सजदा' करने का वादा अपने नाना से कर रहे हैं?

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