मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : बारहवींं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अल्लामा निसार अली उजागर
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 17 Aug, 2023 02:59 PM IST
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बारहवींं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
झंडे लगाओ, घर को सजाओ,
करके चरागाँ, खुशियाँ मनाओ, झूमो…
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
आमद-ए-मुस्तफ़ा मरहबा…
आमद-ए-मुज्तबा मरहबा…
बच्चा बच्चा मुस्कुराया बारहवीं का चाँद आया,
खुशियों का तूफ़ान लाया बारहवीं का चाँद आया
शादमानी के तराने गूँजते हैं दहर में,
वज्द में हर शख़्स आया बारहवीं का चाँद आया
रोशनी ही रोशनी है, चाँदनी ही चाँदनी,
ज़र्रा ज़र्रा जगमगाया बारहवीं का चाँद आया
हो गए हैं बंद सारे ज़ुल्मतों के बाब आज,
दहर में वो नूर आया बारहवीं का चाँद आया
खिल उठीं कलियाँ मुहब्बत की, गुलों पर है निखार,
बाग़-ए-उल्फ़त लहलहाया बारहवीं का चाँद आया
साज़-ए-जाँ पर बज रहा है एक नग़मा बार-बार,
आमीना का लाल आया बारहवीं का चाँद आया
शुक्र करते ही रहो रब का उजागर सुबह-ओ-शाम,
रब का कैसा फ़ज़ल पाया बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
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यह नात शरीफ़ रबी-उल-अव्वल की बारहवीं तारीख, यानी हुज़ूर ﷺ के जन्म की ख़ुशी का एक जोश भरा ऐलान है। इसमें बताया गया है कि नबी पाक ﷺ की आमद से पूरी दुनिया नूरानी हो गई है और हर तरफ़ जश्न का माहौल है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि बारहवीं का चाँद (हुज़ूर ﷺ) आने से अंधेरे के सारे दरवाज़े बंद हो गए हैं और दुनिया का कण-कण नूर से जगमगा उठा है। शायर कहता है कि आमिना के लाल की आमद पर हर बच्चा मुस्कुरा रहा है और मुहब्बत के बाग़ों में ऐसी बहार आई है जो पहले कभी नहीं देखी गई।
| शब्द | अर्थ (हिंदी / English) |
|---|---|
| चरागाँ | रोशनी करना या दीप जलाना / Illumination |
| दहर | दुनिया या संसार / World |
| शादमानी | बेहद ख़ुशी / Joy or Happiness |
| ज़ुल्मतों के बाब | अंधेरे के दरवाज़े / Doors of darkness |
| वज्द | रूहानी मस्ती या जुनून / Ecstasy |
| फ़ज़ल | कृपा या मेहरबानी / Grace |
बारहवीं का चाँद आने का मतलब केवल एक तारीख़ नहीं, बल्कि मानवता के लिए रहमत और नूर का आगमन है। शायर 'उजागर' सभी को घर सजाने, झंडे लगाने और जश्न मनाने का संदेश देते हैं क्योंकि इसी दिन 'आमिना का लाल' आया, जिससे नफ़रतें मिट गईं और पूरी दुनिया में ख़ुशियों का तूफ़ान आ गया।
हुज़ूर ﷺ की आमद पर शायर ने 'ज़ुल्मतों के बाब' (अंधेरे के दरवाज़ों) के बारे में क्या कहा है?