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बन्दा मिलने को क़रीब हज़रत ए क़ादिर गया Lyrics In हिन्दी

(बन्दा मिलने को क़रीब हज़रत-ए-क़ादिर गया, लम्हा-ए-बातिन में गुमने नूर-ए-जाहिर गया)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : बन्दा मिलने को क़रीब हज़रत-ए-क़ादिर गया

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 03 Aug, 2023 03:23 PM IST

बार देखा गया : 197

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

बन्दा मिलने को क़रीब हज़रत-ए-क़ादिर गया,
लम्हा-ए-बातिन में गुमने, नूर-ए-जाहिर गया।

तेरी मर्ज़ी पा गया सूरज भी फेरा उल्टे क़दम,
तेरी उंगली उठ गई, माह का कलेजा चीर गया।

बढ़ चली तेरी जिया, अँधेरे आलम से घटा,
खुल गया देसू तेरा, रहमत का बादल सघन गया।

बन्द गई तेरी हवा, सवाँ में ख़ाक उड़ने लगी,
बढ़ चली तेरी जिया, आतिश पे पानी फिर गया।

तेरी रहमत से सफीयुल्लाह का बेड़ा पार था,
तेरे सदके से नजियुल्लाह का बज़ारा तर गया।

तेरी आमद थी कि बैतुल्लाह मज़ारे को झुका,
तेरी हैबत थी कि हर बुत थरथरा कर गिर गया।

मोमिन उसका क्या हुआ — अल्लाह उसका हो गया,
काफ़िर उनसे क्या फिरा — अल्लाह ही से फिर गया।

वो कि इस दर का हुआ, ख़ल्के खुदा उसकी हुई,
वो कि इस दर से फिरा, अल्लाह उससे फिर गया।

मुझको दीवाना बताते हो, मैं तो होशियार हूँ,
पाँव जब ताइफ़-ए-हरम में थक गए, सर फिर गया।

रहमतुल्लिल-आलमीन! आफ़त में हूँ कैसी करूँ,
मेरे मौला! मैं तो इस दिल में, बला से घिर गया।

मैं तेरे हाथों के सदके! कैसी क़द्रिया थी वो,
जिनसे इतने काफ़िरों का दफ़अतन मुँह फिर गया।

क्यों जनाबे अबू हुरैरा! था वो कैसा जाम-ए-शीर,
जिससे सत्तर साथियों का एक घूँट में मुँह फिर गया।

वास्ता प्यारे का ऐसा हो कि जो सुन्नी मरे,
यूँ न फ़रमाइए कि तेरे शाहिद की वो फ़ाजिर गया।

अर्श पर धूमे मचीं, वो मोमिने-सालिह मिला,
फ़र्श से मातम उठे, वो तैय्यिब-ओ-ताहिर गया।

अल्लाह-अल्लाह ये उरूज-ए-ख़ास-ए-अब्दियत रज़ा,
बन्दा मिलने को क़रीब हज़रत-ए-क़ादिर गया।

ठोकरें खाते फिरोगे उनके दर पर पड़ रहो,
क़ाफ़िला तो ऐ रज़ा — अव्वल गया, आख़िर गया।

बन्दा मिलने को क़रीब हज़रत-ए-क़ादिर गया,
लम्हा-ए-बातिन में गुमने, नूर-ए-जाहिर गया।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह महान नात-ए-पाक (आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान द्वारा रचित) मेअराज की रात, हुज़ूर ﷺ के महान मोज़िजात (चमत्कारों), उनकी ईश्वरीय शक्ति और उनके दर की अज़मत का बेहद गहरा और रूहानी वर्णन करती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि मेअराज की रात अल्लाह के महबूब ﷺ अपने रब के इतने क़रीब हुए जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। हुज़ूर ﷺ को अल्लाह ने वह अधिकार दिया है कि उनकी मर्ज़ी पाकर डूबा हुआ सूरज उल्टे क़दम लौट आया और उनकी उंगली के एक इशारे से चाँद दो टुकड़ों में चीर गया।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
हज़रत-ए-क़ादिरसर्वशक्तिमान अल्लाह की बारगाह
माहचाँद (चन्द्रमा)
ज़िया / जियाप्रकाश या नूर
सफ़ीयुल्लाहहज़रत आदम अलैहिस्सलाम का लक़ब
नजियुल्लाहहज़रत नूह अलैहिस्सलाम का लक़ब
बैतुल्लाहअल्लाह का घर (काबा शरीफ़)
ख़ल्के ख़ुदाअल्लाह की बनाई हुई सृष्टि / दुनिया
जाम-ए-शीरदूध का प्याला
फ़ाजिरगुनहगार या नाफ़रमान

सारांश (Summary)

इस नात शरीफ़ का मुख्य सार यह है कि पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के आने से काबा भी अदब में झुक गया और सारे बुत (मूर्तियाँ) थरथरा कर गिर गए। जो सच्चा मोमिन नबी का हो जाता है, अल्लाह भी उसका हो जाता है, और जो उनके दर से मुँह मोड़ता है, वह ईश्वर से विमुख हो जाता है। अंत में शायर 'रज़ा' दुनिया को नसीहत देते हैं कि यहाँ-वहाँ ठोकरें खाने से बेहतर है कि इंसान हमेशा के लिए नबी की चौखट पर अपना सर झुका दे।

लिरिक्स के मुताबिक, जब नबी-ए-करीम ﷺ की उंगली उठी तो आसमान के किस पिंड (आकाशीय पिंड) का कलेजा चिर गया?

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