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ऐ नसीम ए सहर मेरे सरकार को मेरे बारे में इतना बता दिजिये Lyrics In हिन्दी

(ऐ नसीम ए सहर मेरे सरकार को मेरे बारे में इतना बता दिजिये, या तो मुझ को मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये)


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टाइटल : ऐ नसीम ए सहर मेरे सरकार को मेरे बारे में इतना बता दिजिये

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : असगर रज़ा साहिब रज़ा

नातख्वान/कलाकार: असगर रज़ा साहिब रज़ा

जोड़ा गया : 24 Sep, 2022 12:03 PM IST

बार देखा गया : 2.4K

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

ऐ नसीम ए सहर मेरे सरकार को मेरे बारे में इतना बता दिजिये
ऐ नसीमे सहर मेरे सरकार से मेरे बारे में इतना बता दिजिये (x3)
या तो मुझ को मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये (x3)

काम तो बहुत करती है मेरी नज़र (x2)
फिर भी बेचैन रहता हु ये सोच कर (x2)
बूझ ना जाए कहीं आंख की रोशनी (x2)
गुंबद ए खज़रा जल्दी दिखी दिजिये (x2)

या तो मुझ को मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये (x2)

छड़ के नेज़े के सीने पे शब्बीर ने (x2)
पढ़ के कुरान ऐलान यह कर दिया (x2)
चाहते हो के जिंदगी हमेशा रहे (x2)
नाम पे उनके गर्दन कटा दिजिये (x2)

या तो मुझ को मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये (x2)

जलने वाले जो है वो दहल जाएंगे (x2)
चाहने वाले फ़ोरन मचल जाएंगे (x2)
दोनो है कौन पहचान ना हो अगर (x2)
नारा अहमद रज़ा का लगा दिजिये (x2)

या तो मुझ को मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये (x2)

चांद को देखना हो जमीन पर जिसे (x2)
उससे कुछ मत कहो उस से कुछ मत कहो (x2)
उसे लेकर बरेली चले चले जाईये(x2)
चेहरा अख्तर रज़ा का दिखा दिजिये (x2)

या तो मुझ को मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये (x2)

थानवी कबर में जब लेटाया गया (x2)
सारे कीडे मकोड़ो ने मिलकर कहा (x2)
ये भी गुस्ताक है मेरे सरकार का (x2)
इस्को औकात इस्की दिखा दिजिये (x2)

या तो मुझको मदीना बुला लिजिये या तो दिलको मदीना बना दिजिये

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह भावुकता और गहरी आस्था से भरी एक प्रसिद्ध नात और मनक़बत है, जिसमें सुबह की ठंडी हवा के माध्यम से मदीना शरीफ़ की हाज़िरी, कर्बला का संदेश और अपने मुर्शिद के प्रति अनन्य प्रेम व्यक्त किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे सुबह की ठंडी हवा (नसीमे सहर), मेरे आका ﷺ की बारगाह में जाकर मेरी यह अर्ज़ी पेश कर दो कि या तो मुझे जल्द ही मदीना शरीफ़ बुला लें, या फिर मेरे इस व्याकुल हृदय को ही मदीना बना दें। कवि कहता है कि इससे पहले कि मेरी आँखों की रोशनी चली जाए, मुझे उस हरे गुंबद (गुंबद-ए-ख़ज़रा) का दीदार करा दीजिए और सत्य की राह में इमाम हुसैन (शब्बीर) की तरह सर्वस्व न्योछावर करने का जज़्बा अता कीजिए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
नसीमे सहरसुबह की मंद और ठंडी हवा
गुंबद-ए-ख़ज़राहरा गुंबद (हुज़ूर ﷺ का रौज़ा मुबारक)
शब्बीरहज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) का एक नाम
दहलभयभीत होना / काँप उठना
अख्तर रज़ाताजुश्शरिया (बरेली शरीफ़ के एक प्रसिद्ध सूफी संत)
गुस्ताख़अपमान करने वाला / बेअदब

सारांश (Summary)

कवि अपनी आंतरिक तड़प को हुज़ूर ﷺ तक पहुँचाने के लिए व्याकुल है। कलाम में कर्बला का संदर्भ देकर समझाया गया है कि वास्तविक और अमर जीवन वही है जो हक़ के मार्ग में बलिदान हो जाए। इसके साथ ही, बरेली शरीफ़ के बुज़ुर्गों (आला हज़रत अहमद रज़ा ख़ान और ताजुश्शरिया अख्तर रज़ा ख़ान) के प्रति अपनी दीवानगी ज़ाहिर करते हुए कवि कहता है कि उनका नाम ही सच्चे और झूठे की पहचान करा देता है, तथा हुज़ूर ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करने वालों का अंजाम बहुत बुरा होता है।

शायर के अनुसार, अगर ज़मीन पर ही चाँद का दीदार करना हो, तो इंसान को कहाँ जाकर किसका चेहरा देखना चाहिए?

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