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अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम Lyrics In हिन्दी

(अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम, तेरे सदके जो मिली हर एक नैमत को सलाम)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 20 Apr, 2023 10:20 AM IST

बार देखा गया : 348

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम,
तू जो आया साथ लाया आसमान से राहमतें

तेरे सदके जो मिली हर एक नैमत को सलाम,
अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम

इस महीने में मिल है हमको कुरान ऐ अज़ीम,
इस महीने के सभी लमहात रहमत को सलाम

अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम

फ़तह मक्का बीस रमज़ान उल मुबारक को मिली,
फ़तह मक्का के चेहरों की मससरत को सलाम

अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम

रोज़ा रख कर आटा पीसे हाथों में छाले पड़े,
फातिमा ज़ोहरा की पाकीज़ा मसक्कत को सलाम

अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम,
अलविदा ऐ माहे रमज़ान तेरी अज़मत को सलाम

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह रमज़ान के मुक़द्दस महीने की विदाई पर लिखा गया एक बेहद ख़ूबसूरत और ऐतिहासिक संदर्भों से युक्त अलविदाई कलाम है। इसमें रमज़ान की विदाई के दुःख के साथ-साथ उसकी महानता (अज़मत) और उससे जुड़ी इस्लामी इतिहास की यादों को सलाम पेश किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हम रमज़ान के पाक महीने को उसकी अज़मत के साथ विदा कर रहे हैं, जो अपने साथ आसमान से रहमतों की बारिश लेकर आया था। इसी महीने में मानवता को 'क़ुरान-ए-अज़ीम' जैसी महान किताब मिली, इसलिए इस महीने के एक-एक पल (लमहात) को सलाम पेश किया गया है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
माहे रमज़ानरमज़ान का महीना
अज़मतमहानता / बड़प्पन / प्रतिष्ठा
कुरान ऐ अज़ीममहान क़ुरान (पवित्र ग्रंथ)
लमहातलम्हे / पल (Moments)
फ़तह मक्कामक्का शहर की विजय (जीत)
मससरतख़ुशी / प्रसन्नता
मसक्कत (मुशक़्क़त)कठिन परिश्रम / कड़ी मेहनत

सारांश (Summary)

इस कलाम का मुख्य सार यह है कि रमज़ान का महीना केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि बड़े ऐतिहासिक वाक़यात का भी गवाह है, जैसे 20 रमज़ान को हुई 'फ़तह-ए-मक्का' (मक्का विजय) की ऐतिहासिक ख़ुशी। इसके साथ ही, यह कलाम पैग़ंबर साहब की लाडली बेटी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की उस पाक मुशक़्क़त (कड़ी मेहनत) को याद करता है, जो रोज़ा रखकर अपने हाथों से चक्की पर आटा पीसती थीं, जिससे उनके हाथों में छाले पड़ जाते थे। अंत में, इस महीने से मिली हर बरकत का शुक्रिया अदा करते हुए इसे अदब से अलविदा कहा गया है।

लिरिक्स के मुताबिक, 20 रमज़ान-उल-मुबारक को कौन सी बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी (जीत) मिली थी?

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