मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 28 Sep, 2023 03:15 AM IST
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आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर,
चाँद भी शर्मा गया जब आगया तैबा का चाँद,
हक तो यह है नूर ए हक दिखला गया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
दोनों आलम पर किया एहसान उसकी ज़ात ने,
क़िस्मत ए क़ौनैन को चमका गया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
ज़ुल्मते सब मिट गईं और क़ुफ़्र गिरत हो गया,
रोशनी आलम में फैला गया वो तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आसियों को दी तसल्ली दे के कुरआन का सबक,
कलमा ए लातक न तू फ़रमा गया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
शान ए रहमत के हो कुर्बान आए जो मुनकर नक़ीर,
क़बर में मेरी मदद को आगया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
गर मुसलमान में हो तो मानो उसके हर एक हुक्म को,
रास्तगोई का चालान सिखला गया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
बादलियां रहमत की उठी बारिश होने लगी,
दोनों आलम की फ़िज़ा पर छा गया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
दोनों आलम की मिली दौलत हमें सद्द शुक्र है,
आगया वो आगया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
चाँद भी शर्मा गया जब आगया तैबा का चाँद,
हक तो यह है नूर ए हक दिखला गया तैबा का चाँद
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
आए हुज़ूर आँखों का नूर दिल का सुरूर
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यह कलाम नबी ﷺ की आमद और उनके नूरानी चेहरे की अज़मत का बयान है, जिसमें बताया गया है कि उनके आने से न केवल इस दुनिया के अंधेरे मिट गए, बल्कि दोनों जहानों को खुदा की रहमत नसीब हुई।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ की आमद से ज़माने में छाए कुफ़्र और बुराई के अंधेरे खत्म हो गए। उन्होंने गुनहगारों को क़ुरआन के ज़रिए जीने की राह दिखाई और हक़ की पहचान कराई। शायर कहता है कि उनकी रहमत इतनी वसी (बड़ी) है कि वह क़ब्र की तन्हाई में भी अपने उम्मती की मदद के लिए तशरीफ़ लाते हैं।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| सुरूर (Suroor) | रूहानी खुशी / आनन्द (Spiritual Joy) |
| क़ौनैन (Kaunen) | दोनों जहान / दुनिया और आख़िरत (Both Worlds) |
| ज़ुल्मते (Zulmate) | अंधेरा / अज्ञानता (Darkness/Ignorance) |
| आसियों (Aasiyon) | गुनहगारों / पापियों (Sinners) |
| रास्तगोई (Rastgoi) | सच्चाई / सत्य बोलना (Truthfulness) |
| मुनकर नक़ीर | क़ब्र में सवाल करने वाले फ़रिश्ते (Angels of the Grave) |
हुज़ूर ﷺ के आने से पूरी कायनात की क़िस्मत चमक गई है और हमें हक़ (सत्य) का नूर मिल गया है। इस नात का मुख्य संदेश यह है कि एक सच्चा मोमिन वही है जो नबी ﷺ के हुक्म पर चले और सच्चाई का रास्ता अपनाए, क्योंकि उन्हीं के सदक़े हमें दोनों जहान की दौलत मिली है।
नात के मुताबिक, "तैबा के चाँद" (हुज़ूर ﷺ) ने गुनहगारों को किस चीज़ का सबक़ देकर तसल्ली दी?