मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : आया रबी उन नूर
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 22 Sep, 2023 07:55 AM IST
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गुलशन गुलशन सहरा सहरा बात हुई मशहूर,
महे रबी उन नूर ने बख़्शा रहमत का दस्तूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
प्यारे नबी का नूर चला जब आदम की पेशानी से,
पुहंचते ख़लील तक पहुँचा है रहमत की तुजियानी से,
आदम ता ईशा कहते हैं आया रब का नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आमिना बी यह कहती है, वह कैसी रात सुहानी थी,
हुर ओ मलाइक़, मरियम, सारा के घर पर दरबानी थी,
झूला झुलाने आये नबी को खुल्द-ए-बारि की हुर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
सोचा था इब्लिस ने रब के बंदों को बहकाएंगे,
क़ुफ़्र ओ शिर्क में डाल कर उनको दोज़ख़ में पहुँचाएंगे,
सारे इब्लिसी मंसूबे हो गए चकना चूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आज ज़माने को देते हैं इश्क़ ओ वफ़ा का जाम रज़ा,
ख़ून-ए-जिगर से दिल के वर्क पर लिखते हैं पैग़ाम रज़ा,
रहमत-ए-आलम नूर-ए-मुजस्सम से मत होना दूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
घर घर में इस्लामी परचम आज हमें लहराना है,
इश्क़-ए-रिसालत क्या होता है दुनिया को दिखलाना है,
जश्न-ए-विलादत का मौक़ा है, हर दिल है मस्रूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
आया रबी उन नूर, आया रबी उन नूर
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यह कलाम रबी-उल-अव्वल के महीने और नबी ﷺ की आमद की खुशी का इज़हार है, जिसमें उनके नूर के सफर और उनके आने से दुनिया में आए रूहानी बदलाव को बताया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ के आने की खबर कायनात के कोने-कोने (गुलशन और सहरा) में मशहूर हो गई। उनकी पैदाइश के वक्त जन्नत की हूरें और मुक़द्दस बीबियाँ उनके घर पर हाज़िर थीं, और उनके नूरानी कदम पड़ते ही शैतान के इंसानों को गुमराह करने के सारे मंसूबे मिट्टी में मिल गए।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| सहरा (Sehra) | रेगिस्तान (Desert) |
| दस्तूर (Dastoor) | कानून या नियम (Rule/Law) |
| पेशानी (Peshani) | माथा (Forehead) |
| खुल्द-ए-बारि | जन्नत (Paradise) |
| मस्रूर (Masroor) | खुश (Happy/Joyful) |
| नूर-ए-मुजस्सम | साक्षात नूर (The Embodiment of Light) |
इस नात का सार यह है कि नबी ﷺ की विलादत (जन्म) पूरे आलम के लिए रहमत का संदेश लेकर आई। शायर 'रज़ा' संदेश देते हैं कि हमें उनके बताए हुए इश्क़ और वफ़ा के रास्ते पर चलना चाहिए और उनके आने की खुशी में हर घर में इस्लामी परचम लहराकर दुनिया को उनके प्रति अपनी मोहब्बत दिखानी चाहिए।
इस नात के मुताबिक, नबी ﷺ की पैदाइश के वक़्त शैतान (इब्लीस) के मंसूबों का क्या हाल हुआ?