मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : आला हज़रत हमारी शान है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : नदीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: नदीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 01 Sep, 2025 07:45 AM IST
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आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
इश्क ओ मोहब्बत, इश्क ओ मोहब्बत,
आला हज़रत, आला हज़रत
प्यारे नबी की प्यारी दुआ को आला हज़रत कहते हैं,
शेरे ख़ुदा की लुत्फ़-ओ-अता को आला हज़रत कहते हैं,
गौस-ए-शाह-जीला की रज़ा को आला हज़रत कहते हैं,
और जिया-ए-ख्वाजा-पिया को आला हज़रत कहते हैं
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
होता है और होता रहेगा चर्चा आला हज़रत का,
बजता है और बजता रहेगा डंका आला हज़रत का,
सजता है और सजता रहेगा जलसा आला हज़रत का,
हर जानिब ही लगता रहेगा नारा आला हज़रत का
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
उंगली उठाएगा जो रज़ा पर उसकी कलाई मोड़ेंगे,
बैर रखेगा जो भी रज़ा से उसको ना हरगिज़ छोड़ेंगे,
ताजे-शरीयत से जो जलेगा उसकी कमर हम तोड़ेंगे,
मलके जबीं पर खाके बरेली हर दम बोलेंगे
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
ऐसी ज़हानत किसको मिली है आला हज़रत तेरे सिवा,
तूने फ़कत एक माह के अंदर हिफ़्ज़-ए-कलाम-ए-पाक किया,
तेरा (13) बरस की उमर हुई तो सबसे पहला फतवा लिखा,
इल्म का है तू कोहे हिमालय, क्यों ना पुकारे तेरे गदा
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
इश्क ओ मोहब्बत, इश्क ओ मोहब्बत,
आला हज़रत, आला हज़रत
जज्बा हमारे दिल में भरा है दीन-ए-नबी की खिदमत का,
गिराने न देंगे हश्र तलक हम परचम अहले-सुन्नत का,
बेल्चा लेकर हाथ में अपनी फ़ैज़ी मुजाहिद-ए-मिल्लत का,
काम करेंगे सारे जहां में मसलक-ए-आला-हज़रत का
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
इश्क ओ मोहब्बत, इश्क ओ मोहब्बत,
आला हज़रत, आला हज़रत
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी शान है,
आला हज़रत हमारी जान है
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यह मनकबत इमाम अहमद रज़ा खान (आला हज़रत) की महानता, उनके अपार ज्ञान और नबी ﷺ के प्रति उनके अटूट प्रेम को समर्पित है। इसमें उन्हें सुन्नत के रक्षक और ज्ञान के शिखर के रूप में दर्शाया गया है।
इन पंक्तियों में शायर आला हज़रत की बौद्धिक क्षमता और आध्यात्मिक शक्ति का वर्णन करता है। मात्र 13 वर्ष की आयु में पहला फतवा लिखना और एक महीने में कुरान हिफ्ज़ करना उनकी ज़हानत का प्रमाण है, जिसने पूरी दुनिया में सुन्नियत के परचम को बुलंद किया।
| शब्द (Word) | अर्थ - Meaning (English/Hindi) |
|---|---|
| लुत्फ़-ओ-अता (Lutf-o-Ata) | Grace & Bounty / कृपा और उपहार |
| ज़िया (Ziya) | Light / प्रकाश या चमक |
| जबीं (Jabeen) | Forehead / माथा |
| ज़हानत (Zahanat) | Intelligence / बुद्धिमत्ता या अक्ल |
| कोहे हिमालय (Kohe Himalaya) | Mountain of Himalaya / हिमालय पर्वत |
| मसलक (Maslak) | Path / विचारधारा या रास्ता |
| गदा (Gada) | Beggar / फकीर या याचक |
इस कलाम का सार यह है कि आला हज़रत की पहचान उनका "इश्क-ए-रसूल" है। उन्होंने अपने ज्ञान (इल्म) के माध्यम से अहले-सुन्नत के मार्ग को स्पष्ट किया और बरेली की धरती से इमान की जो लौ जलाई, वह आज भी करोड़ों आशिकों के दिलों में जल रही है। उनके मानने वाले हर हाल में उनके बताए रास्ते (मसलक) पर चलने का संकल्प लेते हैं।
मनक़बत के आखिर में शायर ने "मसलक-ए-आला हज़रत" के लिए किस तरह काम करने का इरादा ज़ाहिर किया है, और "फ़ैज़ी मुजाहिद-ए-मिल्लत" का ज़िक्र करते हुए क्या कहा है?