मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मेरा बादशाह हुसैन है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: मिलाद रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 29 Jul, 2023 04:51 PM IST
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मेरा बादशाह हुसैन है,
मेरा बादशाह हुसैन है।
ये बात किस क़दर हसीं,
जो कह गए मुईनुद्दीन,
कि दीन की पनाह हुसैन है।
हक़ हुसैन या हुसैन,
हक़ हुसैन या हुसैन।
मेरा बादशाह हुसैन है,
मेरा बादशाह हुसैन है।
करे जो कोई हमसरी,
किसी की क्या मजाल है,
हुसैन हर लिहाज़ से,
हुसैन बेमिसाल है।
ये हो चुका है फ़ैसला,
ना कोई दूसरा हसन,
ना कोई दूसरा हुसैन है।
हक़ हुसैन या हुसैन,
हक़ हुसैन या हुसैन।
है जिस की फ़िक्र कर्बला,
हुसैन वो दिमाग है,
ये पंचतन की अंजुमन,
का पाँचवां चराग़ है।
हसन का पहला हमसफ़र,
अली का दूसरा पिसर,
इमाम तीसरा हुसैन है।
हक़ हुसैन या हुसैन,
हक़ हुसैन या हुसैन।
मेरा बादशाह हुसैन है,
मेरा बादशाह हुसैन है।
हिदायत-ए-हुसैन पर,
अमल करो ऐ मोमिनों,
रहेंगे हम बहिश्त में,
यक़ीन रखो ऐ मोमिनों।
क़बूल होगी हर दुआ,
किसी से क्यों डरे भला,
हमारा वास्ता हुसैन है।
हक़ हुसैन या हुसैन,
हक़ हुसैन या हुसैन।
मेरा बादशाह हुसैन है,
मेरा बादशाह हुसैन है।
क़ज़ा के बाद फिर अदा,
नई हयात मिल गई,
अज़ाब से, इताब से,
मुझे नजात मिल गई।
सवाल जब किया गया,
है कौन तेरा पेशवा?
तो मैंने कह दिया — हुसैन है।
हक़ हुसैन या हुसैन,
हक़ हुसैन या हुसैन।
मेरा बादशाह हुसैन है,
मेरा बादशाह हुसैन है।
शहीदे कर्बला का ग़म,
जिसे भी ना गवारा है,
वो बद-अमल, वो बद-नसब,
उसी पे बेशुमार है।
अरे ओ दुश्मन-ए-अज़ल,
तू मर, ज़रा क़ब्र में चल,
पता चलेगा क्या हुसैन है।
हक़ हुसैन या हुसैन,
हक़ हुसैन या हुसैन।
मेरा बादशाह हुसैन है,
मेरा बादशाह हुसैन है।
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यह जोशो-जज़्बे से भरपूर बेहद प्रसिद्ध मनक़बत (इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में) ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के ऐतिहासिक कथन पर आधारित है, जो इस्लाम और हक़ के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले कर्बला के शाह की अज़मत को सलाम करती है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हमारे सच्चे शासक और बादशाह हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) हैं, जिन्होंने कर्बला के मैदान में अपना सब कुछ देकर इस्लाम धर्म (दीन) की रक्षा की और उसे पनाह दी। शायर कहता है कि हुसैन (अ.स.) हर मायने में अतुलनीय (बेमिसाल) हैं और संसार में उनका कोई सानी नहीं है। यहाँ तक कि मृत्यु के बाद क़ब्र में जब मार्गदर्शक (पेशवा) के बारे में पूछा जाएगा, तो हमारा सीधा जवाब होगा कि "मेरा बादशाह हुसैन है।"
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| पनाह | शरण / सुरक्षा या आसरा |
| हमसरी | बराबरी / मुक़ाबला या समानता |
| अंजुमन | महफ़िल / सभा (यहाँ अर्थ पंचतन पाक के पवित्र समूह से है) |
| पिसर | बेटा / पुत्र (हज़रत अली के दूसरे बेटे) |
| बहिश्त | स्वर्ग / जन्नत |
| पेशवा | मार्गदर्शक / नेता या रहबर |
| दुश्मन-ए-अज़ल | हमेशा का शत्रु / पैदाइशी दुश्मन |
इस मनक़बत का मुख्य सार यह है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) पंचतन पाक (पवित्र पाँच हस्ती) की महफ़िल के पाँचवें चिराग और इस्लाम के तीसरे इमाम हैं। शायर मोमिनों को सीख देता है कि हुसैनी मार्ग और उनकी हिदायत पर चलकर ही हमें जन्नत (बहिश्त) और ईश्वरीय प्रकोप (अज़ाब) से मुक्ति मिल सकती है, क्योंकि हमारा वास्ता सीधे हुसैन (अ.स.) से है। जो लोग कर्बला के शहीदों के ग़म और उनकी शहादत का सम्मान नहीं करते, उन्हें मृत्यु के बाद क़ब्र में उतरते ही इमाम हुसैन (अ.स.) की वास्तविक शक्ति और रूहानी मर्तबे का अंदाज़ा हो जाएगा।
लिरिक्स की शुरुआत में ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का कौन सा मशहूर क़ौल (बात) बयान किया गया है?