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लिबास पहनते वक्त की दुआ

(Dua at the time of Dressing)


लिबास पहनते वक्त की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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लिबास पहनते वक्त की दुआ

Updated :29 Apr, 2026 03:08 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन परिवार और घर

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الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي هَذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ

लिबास पहनते वक्त की दुआ

लिबास पहनते वक्त की दुआ

अर्थ:

तमाम खूबिया अल्लाह अज़वजल के लिए जिसने मुझको यह कपड़ा पहनाया और मेरी कूवत और ताकत के बेगैर अता फरमाया।

अंग्रेजी में मतलब:

All excellencies are for Allah Azzawajal Who gave me this cloth to wear and granted me without (using) any strenfth and Power.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

कपड़े पहनना हमारी रोज़मर्रा की एक सामान्य ज़रूरत है, लेकिन इस्लाम में इसे भी अल्लाह का शुक्र अदा करने का एक शानदार मौका बनाया गया है। इस दुआ को पढ़ने का अर्थ है कि हम यह स्वीकार करते हैं कि यह लिबास हमें अल्लाह ने प्रदान किया है और इसे पहनने की शारीरिक ताक़त भी उसी की अता की हुई है। यह दुआ हमारे दिल में विनम्रता (Humility) पैदा करती है और हमें यह अहसास कराती है कि हम अपनी किसी भी निजी ताकत या काबिलियत के बिना कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं। यह हर छोटी चीज़ के लिए अल्लाह के प्रति कृतज्ञ रहने का एक सुंदर तरीका है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ सुन्नत-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूरी तरह साबित है। हज़रत मुआज़ बिन अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:

"जो कोई कपड़े पहने और यह दुआ पढ़े: 'अलहमदुलिल्लाहिल्लज़ी कसाना हाज़ा व रज़कनीहि मिन गैरी हौलिन मिन्नी व ला कुव्वह', तो उसके पिछले (सगीरा) गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।" (सुनन अबू दाऊद, हदीस 4023)

यह हदीस इस सुन्नत की अहमियत और उसके सवाब को दर्शाती है।


सारांश (Summary)

लिबास पहनते वक्त यह दुआ पढ़ना अल्लाह के प्रति शुक्रगुज़ारी का एक बेहतरीन तरीका है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी हर नेमत और शारीरिक शक्ति पूरी तरह से अल्लाह की देन है। इस छोटी सी सुन्नत पर अमल करने से न केवल हमें अल्लाह की याद बनी रहती है, बल्कि यह हमारे पिछले गुनाहों की माफी का जरिया भी बनती है। यह हमारे दैनिक कार्यों को इबादत में बदलने का एक बहुत सरल और प्रभावशाली मार्ग है।

क्या लिबास पहनते वक्त यह दुआ पढ़ने का कोई खास सवाब या फ़ज़ीलत हदीस में बयान की गई है?

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