search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

नया अमामा या नई चादर पहनते वक्त की दुआ

(Dua Wearing A New Turban (Amaamah) or A New Sheet of Cloth)


नया अमामा या नई चादर पहनते वक्त की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

avatar
  • Editors Desk
  • Added1 महीना पहले
  • visibility37बार देखा गया
  • comment0 टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
thumbnail-img

नया अमामा या नई चादर पहनते वक्त की दुआ

Updated :03 May, 2026 04:35 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन पहनावा और दैनिक जीवन परिवार और घर

Also read in

اَللّٰهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ كَمَا كَسَوْتَنِيهِ أَسْأَلُكَ خَيْرَهٗ وَخَيْرَ مَا صُنِعَ لَهٗ وَأَعُوذُ مِنْ شَرِّهٖ وَشَرِّ مَا صُنِعَ لَهٗ

नया अमामा या नई चादर पहनते वक्त की दुआ

नया अमामा या नई चादर पहनते वक्त की दुआ

अर्थ:

या अल्लाह अज़्ज़वजल, तमाम तारीफ़ें तेरे ही लिए हैं। तूने ही मुझे (यह चादर या अमामा) पहनाया है। और मैं तुझसे इसकी भलाई मांगता हूँ और उस चीज़ की भलाई जिसके लिए यह बनाया गया है। और मैं इसके शर से तेरी पनाह मांगता हूँ और उस चीज़ के शर से भी जिसके लिए इसे बनाया गया है।

अंग्रेजी में मतलब:

O Allah Azzawajal, All praise is for you only, you have made me wear( this sheet of cloth or turban) and I ask you for it's goodness, and the goodness of that thing for which It has been made, and I ask you for your refuge from it's badness and badness of that thing for which it has been made.

wand_stars
Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

There may be some mistakes in this summary, if you find anything wrong then please let us know.

keyboard_arrow_down

व्याख्या (Explanation)

यह दुआ हमें सिखाती है कि नए कपड़े, जैसे कि अमामा (पगड़ी) या चादर पहनना केवल एक ज़रूरत या फैशन नहीं, बल्कि अल्लाह का एक बड़ा इनाम है। जब हम यह दुआ पढ़ते हैं, तो हम स्वीकार करते हैं कि इस लिबास को हासिल करने की कुव्वत हमें खुदा ने ही दी है। "भलाई" मांगने का मतलब यह है कि यह कपड़ा हमें सर्दी-गर्मी से बचाए, इसमें बरकत हो और इसे पहनकर हम नेक काम करें। वहीं "शर" (बुराई) से पनाह मांगने का मतलब है कि यह लिबास हमारे अंदर घमंड, दिखावा या फिजूलखर्ची जैसी बीमारियाँ पैदा न करे।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ हदीस की मशहूर किताब सुनन अबू दाऊद (हदीस 4020) और जामिअत तिर्मिज़ी में दर्ज है। हज़रत अबू सईद खुदरी (रज़ि.) रिवायत करते हैं कि जब रसूलुल्लाह ﷺ कोई नया कपड़ा पहनते, तो उसका नाम लेकर (जैसे अमामा या कमीज़) यह दुआ पढ़ते थे। कुरान में भी लिबास की अहमियत का ज़िक्र सूरह अल-अराफ़ (आयात 26) में मिलता है, जहाँ अल्लाह फरमाता है: "ऐ आदम की औलाद! हमने तुम्हारे लिए लिबास उतारा जो तुम्हारी शर्मगाहों को छुपाता है और ज़ीनत (सजावट) भी है, और तक़वे (परहेज़गारी) का लिबास सबसे बेहतर है।"


सारांश (Summary)

नया अमामा या चादर पहनते समय यह दुआ पढ़ना सुन्नत है और अल्लाह का शुक्र अदा करने का एक तरीका है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी हर छोटी-बड़ी चीज़ खुदा की अता की हुई है। इस दुआ के ज़रिए हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि हमारा पहनावा हमें नेक राह पर रखे और हमें अहंकार जैसी बुराइयों से महफूज़ रखे। यह लिबास को महज़ एक कपड़ा नहीं बल्कि इबादत का ज़रिया बना देती है।

क्या आप नए कपड़े पहनते वक्त अल्लाह का शुक्र अदा करना याद रखते हैं?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर:

0 Comments

Leave a Comment

समान मसनून दुआएं देखें