मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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عنوان: Aankhe Bhigo Ke Sabko Rula Kar Chale Gaye
زمرہ: منقبت کے بول (لیرکس) نعت کے بول (لیرکس)
مصنف/گیتکار: سجّاد نظامی (مرہوم)
نعت خوان/ فنکار: سجّاد نظامی (مرہوم)
شامل کیا گیا: 21 Feb, 2024 01:30 PM IST
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आँखे भीगो के दिलको हिला कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
आँखे भीगो के सबको रुला कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
इफ्ता की शान इल्मो हुनर का वकार थे,
सदा मिजाज़ ज़िंदा दिली की बहार थे
महफ़िल हर एक सुनी बना कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
उमर-ए-तमाम दीन की खिदमत में काट दी,
अपने कलम से कुफ्र की तारीख छाठ दी
हुक्म-ए-शरीयत हमको बता कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
दीन-ए-नबी की खिदमते मकबूल हो गई,
सीनों में उनकी उल्फते महफूज हो गई
दीवाना अपना सबको बना कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
एलान सेहरी जिसने बहेड़ी को दे दिया,
और फिर जुलूस-ए-बारहवी भी अता किया
तहरीक कैसी कैसी चला कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
सुल्तान अशरफ इस्म भी साया निशाँन था,
हर एक लेहाज़े से जो बहेड़ी की जान थी
कैसा पहाड़ गम का गिरा कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए