जहाँ पर नबी का घराना लुटा है
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عنوان: Barahwin Ka Chand Aaya
زمرہ: نعت کے بول (لیرکس)
مصنف/گیتکار: علامہ نثار علی اجاگر
نعت خوان/ فنکار: مختلف/نامعلوم
شامل کیا گیا: 17 Aug, 2023 02:58 PM IST
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बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
झंडे लगाओ ! घर को सजाओ !
कर के चराग़ाँ ख़ुशियाँ मनाओ !
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बच्चा बच्चा मुस्कुराया, बारहवीं का चाँद आया
बच्चा बच्चा मुस्कुराया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
शादमानी के तरानें गूँजते हैं दहर में
वज्द में हर शख़्स आया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
रौशनी ही रौशनी है चाँदनी ही चाँदनी
ज़र्रा-ज़र्रा जगमगाया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
साज़-ए-जाँ पे बज रहा है एक नग़्मा बार-बार
आमिना का लाल आया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
खिल उठीं कलियाँ मोहब्बत की, गुलों पर है निखार
बाग़-ए-उल्फ़त लहलहाया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
हो गए हैं बंद सारे ज़ुल्मतों के बाब आज
दहर में वो नूर आया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
शुक्र करते ही रहो रब का, उजागर ! सुब्ह-ओ-शाम
रब का कैसा फ़ज़्ल पाया, बारहवीं का चाँद आया
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
झंडे लगाओ ! घर को सजाओ !
कर के चराग़ाँ ख़ुशियाँ मनाओ !
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
बारहवीं का चाँद आया, बारहवीं का चाँद
आमद-ए-मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा !
आमद-ए-मुजतबा ! मरहबा मरहबा !