खाने से पहले की दुआ
व्याख्या (Explanation)
भोजन शुरू करने से पहले अल्लाह का नाम लेना (बिस्मिल्लाह पढ़ना) इस्लाम में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुन्नत है। यह इस बात का प्रतीक है कि हम अल्लाह को अपना पालनहार (रिज़क देने वाला) मानते हैं और यह भोजन उसकी दी हुई नेमत है। जब हम "बिस्मिल्लाह" पढ़कर खाना शुरू करते हैं, तो उस भोजन में बरकत (आशीर्वाद) शामिल हो जाती है और शैतान उस भोजन में हिस्सेदार नहीं बन पाता। यह छोटी सी आदत हमारे दैनिक भोजन को एक 'इबादत' (पुण्य कार्य) में बदल देती है और हमें हर निवाले के साथ अल्लाह की याद से जोड़े रखती है।
क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?
- हदीस का संदर्भ: नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने खाना शुरू करने से पहले अल्लाह का नाम लेने का स्पष्ट आदेश दिया है (सहीह मुस्लिम, सुनन इब्न माजाह 3264)। यदि कोई खाना शुरू करते समय "बिस्मिल्लाह" कहना भूल जाए, तो उसे कहना चाहिए: "बिस्मिल्लाही अव्वलहु व आखिरहु" (अल्लाह के नाम के साथ, इसके शुरू में और अंत में)।
- कुरान का संदर्भ: कुरान में सूरह अल-अनआम (6:118) में अल्लाह तआला मार्गदर्शन देता है:
"तो उस भोजन में से खाओ जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया हो, यदि तुम उसकी आयतों पर ईमान रखते हो।" यह आयत यह संकेत देती है कि हर आहार पर अल्लाह का नाम लेना एक ईमान वाले की पहचान है।
सारांश (Summary)
भोजन से पहले यह दुआ पढ़ना हमें अल्लाह की नेमतों का शुक्रगुज़ार बनाता है और यह याद दिलाता है कि हमारा रिज़क सिर्फ अल्लाह की तरफ से है। इस सुन्नत पर अमल करने से खाने में बरकत होती है और भोजन हमारे शरीर के लिए अधिक लाभदायी बनता है। यह एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावी कार्य है जो हमारे सामान्य दैनिक जीवन को रूहानी सुकून और बरकत से भर देता है। इसे अपनी आदत बनाने से हम हमेशा अल्लाह के संरक्षण में रहते हैं।
अगर खाना शुरू करते वक्त "बिस्मिल्लाह" कहना भूल जाएं, तो क्या करना चाहिए?