मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Zalim Ko Apna Peer Banane Nahi Gaya
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 28 Jul, 2023 04:14 PM IST
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जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया
लाखों सलाम फातिमा ज़हरा के लाल पर,
सजदा बचाया सर को बचाने नहीं गया
सीने पे तीर खा के बचाया है दिन को,
मेरा हुसैन पीठ दिखाने नहीं गया
चुल्लू में लेके नहर को पानी पीला दिया,
अब्बास अपनी प्यास बुझाने नहीं गया
जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया
असगर यह जानते थे बचाना है दिन को,
यह बात उनको कोई बताने नहीं गया
जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया