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Zalim Ko Apna Peer Banane Nahi Gaya Lyrics In हिन्दी

(Zalim Ko Apna Peer Banane Nahi Gaya, जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया)


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टाइटल : Zalim Ko Apna Peer Banane Nahi Gaya

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी

नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी

जोड़ा गया : 28 Jul, 2023 04:14 PM IST

बार देखा गया : 593

Time to read: 1 min read

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जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया

लाखों सलाम फातिमा ज़हरा के लाल पर,
सजदा बचाया सर को बचाने नहीं गया

सीने पे तीर खा के बचाया है दिन को,
मेरा हुसैन पीठ दिखाने नहीं गया

चुल्लू में लेके नहर को पानी पीला दिया,
अब्बास अपनी प्यास बुझाने नहीं गया

जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया

असगर यह जानते थे बचाना है दिन को,
यह बात उनको कोई बताने नहीं गया 

जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया

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