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जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया Lyrics In हिन्दी

(जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया, मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया)


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टाइटल : जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी

नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी

जोड़ा गया : 28 Jul, 2023 04:16 PM IST

बार देखा गया : 269

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया

लाखों सलाम फातिमा ज़हरा के लाल पर,
सजदा बचाया सर को बचाने नहीं गया

सीने पे तीर खा के बचाया है दिन को,
मेरा हुसैन पीठ दिखाने नहीं गया

चुल्लू में लेके नहर को पानी पीला दिया,
अब्बास अपनी प्यास बुझाने नहीं गया

जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया

असगर यह जानते थे बचाना है दिन को,
यह बात उनको कोई बताने नहीं गया

जालिम को अपना पीर बनाने नहीं गया,
मेरा हुसैन हाथ मिलाने नहीं गया

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह वीरता, त्याग और हक़-ओ-इंसाफ़ से भरपूर एक बेहद प्रभावशाली मनक़बत है। यह कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों द्वारा बातिल (अधर्म) के आगे न झुकने और इस्लाम की रक्षा के लिए दी गई महान क़ुर्बानी को दर्शाती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि मेरे इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्य के मार्ग पर चलते हुए कभी किसी अत्याचारी शासक (यज़ीद) से हाथ नहीं मिलाया और न ही उसे अपना रहबर स्वीकार किया। उन्होंने इस्लाम की रूह और नमाज़ के सजदे की गरिमा को जीवित रखने के लिए अपना शीश तो कटवा दिया, परंतु अपना जीवन बचाने के लिए अधर्म का साथ कभी नहीं दिया।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
पीरआध्यात्मिक गुरु / मार्गदर्शक या रहबर
लालप्रिय पुत्र / बेटा (यहाँ अर्थ सैयदा फ़ातिमा के लाडले बेटे से है)
दीनधर्म / इस्लाम धर्म (नोट: मूल पंक्ति में 'दिन' लिखा है, जो 'दीन' है)
पीठ दिखानायुद्ध के मैदान से भाग जाना / कायरता दिखाना
चुल्लूहथेली में भरा हुआ पानी / अंजलि
नहरछोटी नदी / पानी का स्रोत (फ़ुरात नदी)
अज़लहमेशा का / शुरुआत से

सारांश (Summary)

इस मनक़बत का मुख्य सार यह है कि कर्बला का युद्ध सिद्धांतों और धर्म की रक्षा का युद्ध था, जहाँ इमाम हुसैन (अ.स.) ने सीने पर तीर खाए लेकिन कभी कायरता नहीं दिखाई। उनके भाई हज़रत अब्बास ने नदी पर अधिकार होने के बावजूद पहले दूसरों को पानी पिलाया, मगर अपनी प्यास बुझाने के बजाय बच्चों के लिए पानी लाने को प्राथमिकता दी। यहाँ तक कि नन्हे अली असग़र भी बिना किसी के सिखाए बचपन से ही दीन पर न्योछावर होने का जज़्बा जानते थे।

लिरिक्स के मुताबिक, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा के लाल (इमाम हुसैन) ने सर बचाने के बजाय किस चीज़ को बचाया?

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