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वो नवासा है सरकार का Lyrics In हिन्दी


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टाइटल : वो नवासा है सरकार का

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : फरहान बरकाती

नातख्वान/कलाकार: फरहान बरकाती

जोड़ा गया : 12 Oct, 2022 08:49 AM IST

बार देखा गया : 434

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

फातह-ऐ-करबला, इब्नन-ऐ-शेरे खुदा, जो ना पीछे हठा,
शोर है जिसकी तलवार का,
वो नवासा है सरकार का

कहने को थे हजारों यजीदी मगर,
आले पाक-ऐ-नबी से मिली जब नज़र,
देखकर उनके तेवर वो घबरा गए,
दिन में दुश्मन को तारे नज़र आगए,
भूली होगी ना नहरे फुरात अभी,
तोड़ता होगा उस पे कयामत अभी,
रोब अब्बास अलमदार का,
वो नवासा है सरकार का

जुलफकर -ऐ-अली दस्त-ऐ-अकबर में थी,
वही तलवार जो बाब-ऐ-खेबर में थी,
एक तरफ उड़ाते गया सर पे सर,
शहजादे ने ऐसा मचाया गदर,
रन में अकबर के लब पे सदा थी यही,
रांग फीका हुआ है ना होगा कभी,
मेरे बाबा की दस्तार का,
वो नवासा है सरकार का

मुस्तफा के नवासों को पहचान ले,
है ये सरदार-ऐ-जन्नत भी यह जान ले,
रब ने बकशे हा इनको बड़े मरतबे,
कपड़े आए है जन्नत से उनके लिए,
उनको काँधे पे बिठालेते थे मुस्तफा,
ऐ यजीद अब बता तेरी औकात क्या,
तू नहीं उनके मयार का,
वो नवासा है सरकार का

खेल थोड़ी है आले नबी पर सितम,
दोनों आलम को इसका अभी तक है गम,
छोड़ जाएंगे ना ऐसे फरहान को,
शायद इसको समझते हैं आसान वो,
पेश होंगे यज़िदी जो पेशे खुदा,
हशर में हशर होगा बोहोत ही बुरा,
इब्नन-ऐ-ज़हरा के गद्दार का,
वो नवासा है सरकार का

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कर्बला के मैदान में पैगंबर हज़रत मोहम्मद ﷺ के पवित्र परिवार (अहले-बैत) और विशेषकर हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) की अदम्य वीरता, मर्यादा और उनके विरोधियों की पराजय का एक ओजपूर्ण और प्रभावशाली वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि कर्बला को जीतने वाले और 'शेर-ए-खुदा' (मौला अली) के लाडले इमाम हुसैन (र.अ.) ने अपनी वीरता से यज़ीदी सेना के हौसले पस्त कर दिए। हज़रत अब्बास अलमदार का रोब और हज़रत अली अकबर के हाथों में मौला अली की ज़ुल्फ़िकार तलवार देखकर दुश्मन थर-थर काँपने लगे, क्योंकि ये कोई साधारण योद्धा नहीं बल्कि जन्नत के नौजवानों के सरदार और स्वयं नबी के नवासे थे।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
फ़ातह-ए-करबलाकर्बला के विजेता / मैदान को जीतने वाले
इब्न-ए-शेरे खुदाअल्लाह के शेर (मौला अली) के बेटे
नहरे फुरातफुरात नदी (कर्बला का ऐतिहासिक दरिया)
अलमदारध्वजवाहक / झंडा उठाने वाले (हज़रत अब्बास का लक़ब)
दस्त-ए-अकबरहज़रत अली अकबर (इमाम हुसैन के सुपुत्र) के हाथ
बाब-ए-खेबरखेबर का क़िला (जहाँ मौला अली ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी)
दस्तारपगड़ी / मान-सम्मान और सम्मान का प्रतीक
मयारस्तर / दर्जा या हैसियत
इब्न-ए-ज़हरासैयदा फ़ातिमा ज़हरा के लाल

सारांश (Summary)

हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) और उनके साथियों ने अधर्म के विरुद्ध युद्ध कर कर्बला के मैदान को हमेशा के लिए फतह कर लिया। शायर 'फ़रहान' चेतावनी देते हैं कि जिन नवासों को स्वयं मोहम्मद ﷺ अपने कंधों पर बिठाते थे, उनके सामने अत्याचारी यज़ीद की कोई बिसात नहीं है। संसार के इस सबसे बड़े अन्याय (आले-नबी पर ज़ुल्म) का शोक आज भी दोनों जहान मनाते हैं, और प्रलय (हश्र) के दिन ईश्वर की अदालत में इन गद्दारों का अंजाम बेहद खौफनाक होगा।

शायर के अनुसार, हज़रत अली अकबर (र.अ.) के हाथों में कौन सी तलवार थी जो पहले बाब-ए-खैबर (खैबर के किले) में मौला अली के पास थी?

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