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तुम्हारा नाम मुसीबत में जब लिया होगा Lyrics In हिन्दी

(तुम्हारा नाम मुसीबत में जब लिया होगा, हमारा बिगड़ा हुआ काम बन गया होगा)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : तुम्हारा नाम मुसीबत में जब लिया होगा

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी

जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 09:04 AM IST

बार देखा गया : 620

Time to read: 4 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

तुम्हारा नाम मुसीबत में जब लिया होगा,
हमारा बिगड़ा हुआ काम बन गया होगा।

गुनहगार पे जब लुत्फ़ आपका होगा,
किए बग़ैर किया बे-किया किया होगा।

ख़ुदा का लुत्फ़ हुआ होगा दस्तगीर ज़रूर,
जो गिरते गिरते तेरा नाम ले लिया होगा।

दिखाई जाएगी महशर में शान-ए-महबूबी,
कि आप ही की खुशी आपका कहा होगा।

ख़ुदा-ए-पाक की चाहेंगे अगले पिछले खुशी,
ख़ुदा-ए-पाक खुशी उनकी चाहता होगा।

किसी के पांव की बेड़ी ये कटे होंगे,
कोई असीर-ए-ग़म उनको पुकारता होगा।

किसी तरफ़ से सदा आएगी हज़ूर आओ,
नहीं तो दम में ग़रीबों का फ़ैसला होगा।

किसी के पल्ले पे ये होंगे वक़्त-ए-वज़्न-ए-अमल,
कोई उम्मीद से मुँह उनका तक रहा होगा।

कोई कहेगा दहाई है या रसूलअल्लाह,
तो कोई थाम के दामन मचल गया होगा।

किसी को ले के चलेंगे फ़रिश्ते सू-ए-जहीम,
वो उनका रास्ता फिर फिर के देखता होगा।

शिकस्ता पा हूँ मेरे हाल की खबर कर दो,
कोई ये रो रो के कह रहा होगा।

ख़ुदा के वास्ते जल्द उनसे अर्ज़-ए-हाल करो,
किसे खबर है कि दम भर में हाय क्या होगा।

पकड़ के हाथ कोई हाल-ए-दिल सुनाएगा,
तो रो के क़दमों से कोई लिपट गया होगा।

ज़बान सूखी दिखा कर कोई लब-ए-कौसर,
जनाब-ए-पाक के क़दमों पे गिर गया होगा।

निशान-ए-ख़ुशरवे दी दूर की ग़ुलामों को,
लिवा-ए-हम्द का परचम बता रहा होगा।

कोई क़रीब-ए-तराज़ू कोई लब-ए-कौसर,
कोई सिरात से उनको पुकारता होगा।

ये बेक़रार करेगी सदा ग़रीबों की,
मुक़द्दस आंखों से तार अश्क का बंधा होगा।

वो पाक दिल के नहीं जिसको अपना अंदेशा,
हुजूम-ए-फ़िक्र ओ तरद्दुद में घिर गया होगा।

हज़ार जान फ़िदा नर्म नर्म पांव से,
पुकार सुन के असीरों की दौड़ता होगा।

अज़ीज़ बच्चे को मां जिस तरह तलाश करे,
ख़ुदा गवाह वही हाल आपका होगा।

ख़ुदाई भर इन्हीं हाथों को देखती होगी,
ज़माना भर इन्हीं क़दमों पे लोटता होगा।

बनी है दम पे दहाई है ताज वाले की,
ये ग़ुल ये शोर ये हुंगामे जा-ब-ज होगा।

मक़ाम फ़ासिलों पर काम मुख़्तलिफ़ इतने,
ये दिन ज़ुहूर-ए-कमाल-ए-हज़ूर का होगा।

कहेंगे और नबी “इज़्हबू इला ग़ैरी”,
मेरे हज़ूर के लब पर “अना लहा” होगा।

दुआ-ए-उम्मते बदकार विरद-ए-लब होगी,
ख़ुदा के सामने सज्दे में सर झुका होगा।

ग़ुलाम उनकी इनायत से चैन में होंगे,
अदू हज़ूर का आफ़त में मुबतला होगा।

मैं उनके दर का भिखारी हूँ फ़ज़्ल-ए-मौला से,
हसन फ़क़ीर का जन्नत में बिस्तरा होगा।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह पंक्तियाँ कयामत (महशर) के मैदान का आँखों देखा हाल बयां करती हैं, जहाँ हर कोई अपने दुखों में डूबा होगा। इस नात में बताया गया है कि उस भयानक समय में हुज़ूर ﷺ अपनी परवाह किए बिना एक माँ की तरह अपने गुनहगार ग़ुलामों को ढूँढ-ढूँढ कर उनकी शफ़ाअत (सिफारिश) फरमाएंगे।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि मुसीबत के समय हुज़ूर ﷺ का नाम लेने मात्र से बिगड़े काम बन जाते हैं। शायर कहता है कि कयामत के दिन जब फ़रिश्ते पापियों को नरक (जहीम) की तरफ ले जा रहे होंगे, तब नबी-ए-करीम ﷺ अपनी उम्मत की बेक़रार पुकार सुनकर उनकी मदद के लिए दौड़ेंगे और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचाएंगे।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
दस्तगीरमददगार / हाथ पकड़कर सहारा देने वाला
असीर-ए-ग़मदुखों का मारा / दुखों का क़ैदी
सू-ए-जहीमनरक की ओर / जहन्नम की तरफ
शिकस्ता पाथका हुआ / जिसके पैर ज़ख्मी या बेदम हों
लब-ए-कौसरहौज़-ए-कौसर का किनारा
तरद्दुदचिंता / फ़िक्र / उलझन
इज़्हबू इला ग़ैरी"किसी और के पास जाओ" (अन्य नबियों के शब्द)
अना लहा"मैं हूँ इस काम (शफ़ाअत) के लिए" (हुज़ूर ﷺ के शब्द)
अदूदुश्मन / विरोधी

सारांश (Summary)

महशर की तपिश और अफ़रा-तफ़री के माहौल में जब बड़े-बड़े पैगंबर भी "इज़्हबू इला ग़ैरी" कहकर विवशता जताएंगे, तब सिर्फ हमारे हुज़ूर ﷺ "अना लहा" कहकर उम्मत की बख्शिश के लिए सज्दे में गिर जाएंगे। शायर 'हसन' कहते हैं कि हुज़ूर ﷺ की इसी बेपनाह रहमत और इनायत के सदके उन जैसे अदना भिखारी का ठिकाना भी जन्नत में यक़ीनी होगा।

कयामत के दिन जब बाकी नबी "इज़हबू इला ग़ैरी" कहेंगे, तब हुज़ूर ﷺ के मुबारक लबों पर कौन से अलफ़ाज़ होंगे?

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