मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : तेज़ आँधी में जला है मसलक ए अहमद रज़ा
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 07 Sep, 2025 03:07 PM IST
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तेज़ आँधी में जला है, मसलक-ए-अहमद रज़ा,
वो चराग़-ए-मुस्तफ़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
शम्म-ए-दीन-ए-मुस्तफ़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा,
यानी अहमद की रज़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
आप बरक़ाती घराने में तो चल कर देखिए,
बच्चा-बच्चा बोलता है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
वो चराग़-ए-मुस्तफ़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
किस में है महबूबियत, और किस में है मर्दूदियत,
दूर से पहचानता है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
आशिक़ान-ए-मुस्तफ़ा की उंगलियाँ पकड़े हुए,
सू-ए-जन्नत ले चला है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
हज़रत-ए-नूरी मियाँ का कौल-ए-फ़ैसल देखिए,
मेरे घर का एक दिया है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
हामी-ए-अहले सुन्न सय्यद सिराज अज़हर की ज़ात,
इनकी घुट्टी में पड़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
मेरे घर का एक दिया है, मसलक-ए-अहमद रज़ा,
वो चराग़-ए-मुस्तफ़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
तेज़ आँधी में जला है, मसलक-ए-अहमद रज़ा,
वो चराग़-ए-मुस्तफ़ा है, मसलक-ए-अहमद रज़ा
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यह मनक़बत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान के 'मसलक' (सिद्धांत और मार्ग) की दृढ़ता और उसकी सच्चाई बताती करती है। इसमें बताया गया है कि यह मार्ग केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि स्वयं नबी ﷺ की इच्छा और दीन की रोशनी है।
कवि कहता है कि आला हज़रत का मार्ग वह चिराग है जो विरोध की 'तेज़ आँधियों' के बावजूद जगमगा रहा है क्योंकि इसे मुस्तफ़ा ﷺ का नूर प्राप्त है। यह मार्ग सत्य (महबूबियत) और असत्य (मर्दूदियत) के बीच फर्क करने की कसौटी है और अपने प्रेमियों का हाथ पकड़कर उन्हें जन्नत की ओर ले जाता है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मसलक | विचारधारा या धार्मिक मार्ग |
| शम्म | मोमबत्ती या रोशनी |
| अहमद की रज़ा | पैग़म्बर मोहम्मद ﷺ की पसंद/इच्छा |
| महबूबियत | प्रिय होना (ईश्वर का पसंदीदा होना) |
| मर्दूदियत | ठुकराया हुआ या घृणित होना |
| सू-ए-जन्नत | स्वर्ग की दिशा में |
| कौल-ए-फ़ैसल | अंतिम और निर्णायक बात |
| हामी | रक्षक या समर्थक |
इस कलाम का सार यह है कि 'मसलक-ए-आला हज़रत' वास्तव में इस्लाम का वह शुद्ध रूप है जो हर युग की चुनौतियों और विरोधों का डटकर सामना करता आया है। यह वह रूहानी चिराग है जो बरक़ाती घराने के महान संतों के आशीर्वाद से रोशन है और जो भी इस रास्ते पर चलता है, वह गुमराह होने से बच जाता है।
"तेज़ आँधी में जला है मसलक-ए-अहमद रज़ा"—क्या यह पंक्ति हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अपने ईमान पर अडिग रहने की प्रेरणा नहीं देती?