اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : सोहणा आया ते सज गए ने गलियां बाज़ार
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
जोड़ा गया : 04 Sep, 2025 09:15 PM IST
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वादी वादी बस्ती बस्ती दीवानों का नारा,
सोहणा आया ते सज गए ने गलियां बाज़ार।
सानी ना कोई मेरे सोहणे नबी लाजपाल दा,
लब के लियावां कित्थों सोहणा तेरे नाल दा।
सोहणा आया ते सज गए ने गलियां बाज़ार,
सोहणा आया ते सज गए ने गलियां बाज़ार।
शाना'आं ओढ़ीयां उचियां ते रुतबा कमाल दा,
लब के लियावां कित्थों सोहणा तेरे नाल दा।
क्यों ना सोहणे दियां सिफ़्तां करां मैं,
दम दम ओधा क्यों ना ज़िक्र करां मैं,
रब ने बनाया ओधा रुतबा कलम दा,
लब के लियावां कित्थों सोहणा तेरे नाल दा।
सरकार की आमद मरहबा, दिलदार की आमद मरहबा।
आका की आमद मरहबा, डाटा की आमद मरहबा।
सोहणे की आमद मरहबा, प्यारे की आमद मरहबा।
सब झूम झूम के मरहबा, लब चूम चूम के मरहबा।
मेरा ते ईमान ए तुसी मेरे कौल हो,
आप ही रब दे आखरी रसूल हो,
रब ने बनाया नहीं कोई तेरे नाल दा,
मैं लब के लियावां कित्थों सोहणा तेरे नाल दा।
ऐदा सोहणा नबी कोई दुनिया ते आया नहीं,
यार ऐहो जया कोई रब ने बनाया नहीं,
दीद मेरे नबी दी ए रब दा नज़ारा।
कर के इशारा सोहणा सूरज नूं मोड़दा,
आपे चांद तोड़दा ते आपे चांद जोड़दा,
बिगड़ी बनावे मेरे नबी दा इशारा।
देंदे ने गवाही ज़र्रे ज़र्रे कोहे तूर दे,
वेखदे नसीबां वाले जलवे हुज़ूर दे,
चौदवीं दा चांद ते अर्शां दा तारा।
कहंदी ए हलीमा मुख वेख लाजपाल दे,
मैं लब के लियावां कित्थों सोहणा तेरे नाल दा।
नूरी नूरी चेहरा ते ज़ुल्फां ने कालियां,
सोहणा उचचा सीना ते अखियां ने प्यारियां,
शाना'आं ओढ़ीयां उचियां ते रुतबा कमाल दा,
लब के लियावां कित्थों सोहणा तेरे नाल दा।
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यह प्रसिद्ध पंजाबी नात हुज़ूर (स.अ.व) के मिलाद (जन्म) की खुशी और उनके बेमिसाल हुस्न ओ जमाल का एक खूबसूरत नज़राना है। इसमें आशिक़ों के उस जज़्बे को दिखाया गया है जो अपने नबी के आने पर गलियों और बाज़ारों को सजाकर अपनी खुशी ज़ाहिर करते हैं।
Lyrics Explanation
इन पंक्तियों का मुख्य उद्देश्य नबी (स.अ.व) की अज़मत और उनके जैसा कोई दूसरा न होने की हकीकत को बयान करना है। कलाम में उनके मोजज़ों (चमत्कारों), जैसे सूरज को मोड़ना और चाँद के टुकड़े करने का ज़िक्र करके यह बताया गया है कि सारी कायनात उनके इशारों पर चलती है और उनकी दीद (दर्शन) ही रब का नज़ारा है।
Word Meanings (शब्द-अर्थ)
| Word | Meaning (Hindi/English) |
|---|---|
| सोहणा | सुंदर / मनमोहक (Beautiful) |
| लाजपाल | लाज रखने वाला / रक्षक (Protector of Honor) |
| सानी | समान / बराबरी का (Equal/Match) |
| लब के | ढूँढ कर (By searching) |
| कित्थों | कहाँ से (From where) |
| आमद | आगमन / आना (Arrival) |
| सिफ़्तां | तारीफें / गुणगान (Praises) |
| अर्शां | आसमानों / फलक (Heavens) |
Summary (सार)
इस कलाम का सार यह है कि अल्लाह तआला ने नबी-ए-करीम (स.अ.व) जैसा हसीन और ऊँचे रुतबे वाला व्यक्तित्व न कभी बनाया है और न कभी दुनिया में आएगा। उनकी पैदाइश पर पूरी दुनिया को सजाया जाता है क्योंकि वे खुदा के आखिरी रसूल और महबूब हैं। हलीमा दाई से लेकर कोह-ए-तूर का ज़र्रा-ज़र्रा उनकी गवाही देता है, और उनकी एक झलक पाना ही मोमिन के लिए सबसे बड़ी खुशकिस्मती है।
नात के आखिरी बंद (पद) में हुज़ूर ﷺ के "नूरी चेहरे" और "ज़ुल्फ़ां" (बालों) के साथ उनके सीने और आँखों की क्या खूबी बयान की गई है?