मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : सर से पाँव तक हर अदा है लाजवाब
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 09:00 AM IST
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सर से पाँव तक हर अदा है लाजवाब,
ख़ूबियों में नहीं तेरा जवाब।
हुस्न है बेमिसाल, सूरत लाजवाब,
मैं फ़िदा तुम पर, आप हो अपना जवाब।
पूछे जाते हैं अमल, मैं क्या कहूँ,
तुम सिखा जाओ मेरे मौला जवाब।
पलटे हैं हमसे निकम्मे बेशुमार,
है नहीं कहीं उस आस्ताने का जवाब।
रोज़-ए-महशर एक तेरा आसरा,
सब सवालों का जवाब-ए-लाजवाब।
मैं याद-ए-तैबा के सदके ऐ कलीम,
पर कहाँ उनकी कफ़-ए-पा का जवाब।
क्या अमल तूने किए, उस का सवाल,
तेरी रहमत चाहिये, मेरा जवाब।
महर-ओ-माह ज़ारे हैं उनकी राह के,
कौन दे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा का जवाब।
तुम से उस बीमार को सेहत मिले,
जिसको दे दे हज़रत-ए-ईसा जवाब।
देख रिज़वाँ दाश्त-ए-तैबा की बहार,
मेरी जन्नत का न पाएगा जवाब।
शोर है लुत्फ़ ओ अताआ का शोर है,
मांगने वाला नहीं सुनता जवाब।
जुर्म की पर्ताश पाते अहल-ए-जुर्म,
उल्टी बातों का न हो सीधा जवाब।
पर तुम्हारे लुत्फ़ आर ऐ आ गए,
दे दिया महशर में बिपुर्शिश जवाब।
ऐ हसन, महव-ए-जमाल-ए-रूह-ए-दोस्त,
ऐ नक़ीरैन, इस से फिर लेना जवाब।
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यह पंक्तियाँ नबी-ए-करीम ﷺ की बेमिसाल सुंदरता, उनके अद्वितीय गुणों और महशर (कयामत) के मैदान में मिलने वाले उनके असीम सहारे का सुंदर वर्णन करती हैं। इसमें भक्त (शायर) अपने कर्मों की कमी को स्वीकार करते हुए केवल हुज़ूर ﷺ की रहमत और उनके दीदार को अपना अंतिम सहारा मानता है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ का स्वरूप और उनकी हर अदा सर्वोत्कृष्ट और लाजवाब है, जिनके पवित्र दर (आस्ताने) पर हम जैसे अनगिनत कमज़ोरों का पालन-पोषण होता है। शायर कहता है कि जब कयामत या क़्रब में मुझसे मेरे कर्मों का हिसाब माँगा जाएगा, तो मेरा एकमात्र और सबसे उत्तम जवाब केवल हुज़ूर ﷺ का पवित्र नाम और उनकी दया (रहमत) होगी।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| लाजवाब | बेमिसाल / जिसका कोई सानी न हो |
| आस्ताने | चौखट / पवित्र दरबार |
| रोज़-ए-महशर | कयामत का दिन / न्याय का दिन |
| कफ़-ए-पा | पैरों के तलवे |
| महर-ओ-माह | सूरज और चाँद |
| दाश्त-ए-तैबा | मदीने का रेगिस्तान या जंगल |
| बिपुर्शिश | बिना किसी पूछताछ या रोक-टोक के |
| नक़ीरैन | मुनकर और नकीर (क़्रब में सवाल पूछने वाले फ़रिश्ते) |
इस नात-ए-पाक में मदीने की बहार को स्वर्ग (जन्नत) से भी उत्तम बताया गया है, जहाँ हुज़ूर ﷺ की कृपा से ऐसे असाध्य बीमार भी ठीक हो जाते हैं जिन्हें हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने भी जवाब दे दिया हो। शायर 'हसन' (हसन रज़ा खान) अंत में कहते हैं कि जब क़्रब में फ़रिश्ते (नक़ीरैन) सवाल करने आएँ, तो वे रुक जाएँ क्योंकि उनका दिल अपने महबूब के सौंदर्य में खोया हुआ है, और वही सौंदर्य उनके हर सवाल का लाजवाब उत्तर है।
शायर ने क़ब्र में सवाल पूछने वाले फ़रिश्तों (नकीरैन) को किस वजह से बाद में जवाब लेने को कहा है?