रुख़ दिन है या महर-ए-समा ये भी नहीं वो भी नहीं
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टाइटल : Ramzan Hai Allah Ki Qurbat Ka Mahina
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 27 Mar, 2023 07:12 AM IST
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रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
है मगफिरते हक की निदा अशर ऐ सानी
है मगफिरते हक की निदा अशर ऐ सानी
अल्लाह की है खास आता अशरा ऐ सानी
बकशीश का महिना है इनायत का महिना
रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
खुल जाते है इस अशरा में बकशीश के दरीनचे
खुल जाते है इस अशरा में बकशीश के दरीनचे
हुरे भी बयान करती है शाहेन के कसीदे
है आलमे बाला में भी शोहरत का महिना
रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
रूहानी मदारीज का उनवान यह अशरा
रूहानी मदारीज का उनवान यह अशरा
अल्लाह का कासा इन पे है एहसान यह अशरा
काशाने खुद की है मोहब्बत का महिना
रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना