मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 27 Mar, 2023 07:14 AM IST
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रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
है मगफिरते हक की निदा अशर ऐ सानी
है मगफिरते हक की निदा अशर ऐ सानी
अल्लाह की है खास आता अशरा ऐ सानी
बकशीश का महिना है इनायत का महिना
रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
खुल जाते है इस अशरा में बकशीश के दरीनचे
खुल जाते है इस अशरा में बकशीश के दरीनचे
हुरे भी बयान करती है शाहेन के कसीदे
है आलमे बाला में भी शोहरत का महिना
रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
रूहानी मदारीज का उनवान यह अशरा
रूहानी मदारीज का उनवान यह अशरा
अल्लाह का कासा इन पे है एहसान यह अशरा
काशाने खुद की है मोहब्बत का महिना
रमजान है अल्लाह की कुरबत का महिना
जिस्मानी और रूहानी इबादत का महिना
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यह पवित्र और रूहानी नज़्म माहे-रमज़ान, विशेष रूप से इसके दूसरे कालखंड यानी 'अशरा-ए-सानी' (मगफ़िरत का अशरा) की महानता को बयां करती है। इसमें बताया गया है कि यह महीना न केवल शारीरिक उपवास (भूख-प्यास) का है, बल्कि आत्मा को शुद्ध करके ईश्वर के करीब ले जाने का माध्यम है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि रमज़ान का महीना अल्लाह के बेहद करीब (सामीप्य) होने और तन-मन से उसकी उपासना करने का समय है। इस महीने के दूसरे दस दिनों (अशरा-ए-सानी) में ईश्वर की ओर से पापों की क्षमा (मगफ़िरत) की गूंज उठती है, जिसके कारण आसमानों में भी इस महीने की धूम मच जाती है और बंदों के लिए दया के झरोखे खुल जाते हैं।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| कुरबत | समीपता / नज़दीकी |
| मगफ़िरत-ए-हक़ | सच्चे ईश्वर की ओर से मिलने वाली क्षमा या माफ़ी |
| निदा | पुकार / आवाज़ |
| अशरा-ए-सानी | रमज़ान के दूसरे १० दिन (११वां से २०वां रोज़ा) |
| दरीनचे (दरीचे) | झरोखे / खिड़कियाँ |
| आलम-ए-बाला | ऊँचा संसार / आसमान या फ़रिश्तों की दुनिया |
| रूहानी मदारीज | आध्यात्मिक पद या ऊँचे आत्मिक स्तर |
| ख़ासान-ए-ख़ुदा | ईश्वर के प्रिय और नेक बंदे |
इस कलाम का मूल सार यह है कि रमज़ान का दूसरा अशरा अल्लाह के विशेष उपहार और बंदों पर उसके असीम अहसान के रूप में आता है, जहाँ जन्नत की हूरें भी रोज़ेदारों की प्रशंसा (क़सीदे) करती हैं। यह समय इंसानी आत्मा के आध्यात्मिक विकास का एक सुनहरा अवसर है, जो अल्लाह के नेक बंदों के दिलों में ईश्वरीय प्रेम की लौ को और अधिक प्रज्वलित कर देता है।
लिरिक्स के मुताबिक, रमज़ान के 'अशरा-ए-सानी' (दूसरे अशरे) में ख़ुदा की तरफ से किस चीज़ की 'निदा' (पुकार) आती है और इस अशरे में क्या खुल जाता है?