اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 08 Aug, 2023 02:13 PM IST
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क़ादरी आस्ताना सलामत रहे,
मुस्तफ़ा का घराना सलामत रहे
पल रहे हैं जहाँ से ये दोनों जहाँ,
वो साक़ी आस्ताना सलामत रहे
दर्दमंदों सर पर है साया फ़िगन,
आप का शामियाना सलामत रहे
तुम से मंसूब है ज़िंदगी का निसाब,
हश्र तक ये फ़साना सलामत रहे
ये नक़ीरैन बोले मुझे क़ब्र में,
मुस्तफ़ा का दीवाना सलामत रहे
हुक्म था कि अदा हों नमाज़ें पचास (50),
आपका आना-जाना सलामत रहे
जिसने तासीर की, ख़त्म-ए-तासीर की,
वो नबी का दीवाना सलामत रहे
जिनके चेहरे थे ग़मगीन ख़ुश हो गए,
आपका मुस्कुराना सलामत रहे
अित्रत-ए-फ़ातिमा पर उजागर निसार,
सय्यदा का घराना सलामत रहे
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यह मनक़बत/नात हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के पवित्र घराने (अहले-बैत) और ग़ौस-ए-आज़म शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी के दरबार की अज़मत और बरकत का ख़ूबसूरत बयान है।
इस कलाम का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ का मुबारक घराना और क़ादरी दरबार हमेशा सलामत रहे, क्योंकि यहीं से दोनों जहानों को पालने वाली रहमत बंटती है। शायर कहता है कि मेराज की रात आप ﷺ के आने-जाने के सदक़े ही उम्मत को पचास की जगह पाँच वक़्त की नमाज़ें मिलीं, और आप ﷺ की निस्बत से क़ब्र में भी फ़रिश्ते (नकीरैन) दीवानों का अदब करते हैं।
| शब्द (Word) | अर्थ (Hindi / English Meaning) |
|---|---|
| आस्ताना | दरबार / चौखट (Threshold / Court) |
| साक़ी | पिलाने वाला / यहाँ मुराद रहमत बांटने वाले से है (Giver / Provider) |
| साया फ़िगन | साया करने वाला / छाँव देने वाला (Casting a shadow) |
| शामियाना | टेंट / छत्रछाया (Canopy / Shelter) |
| मंसूब | जुड़ा हुआ / संबंधित (Associated / Linked) |
| निसाब | पाठ्यक्रम / ज़िंदगी का मूल आधार (Syllabus / Rule of life) |
| नक़ीरैन | क़ब्र में सवाल पूछने वाले दो फ़रिश्ते (Angels of the grave) |
| तासीर | असर / प्रभाव (Effect / Influence) |
| ग़मगीन | उदास / दुखी (Sad / Sorrowful) |
| अित्रत | संतान / औलाद व ख़ानदान (Progeny / Offspring) |
| निसार | क़ुर्बान होना (Sacrificed / Devoted) |
पूरी कायनात का रिज़्क़ और हिदायत मुस्तफ़ा ﷺ के घराने और उनके चहेते संतों (जैसे ग़ौस-ए-आज़म) के सदक़े जारी है। शायर 'उजागर' दुआ करता है कि सैयदा-ए-क़ायनात बीबी फ़ातिमा का घराना हश्र तक सलामत रहे, क्योंकि उसी पाक चौखट के सहारे दुनिया और आख़िरत दोनों संवरती हैं।
इस कलाम के मुताबिक, क़ब्र में फ़रिश्ते (नकीरैन) किस के लिए सलामत रहने की दुआ करते हैं?