मेरे सरकार आए
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टाइटल : Nazar Ko Baksh Do Aisa Asar Garib Nawaz
श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
जोड़ा गया : 11 Jan, 2023 12:49 PM IST
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Nazar Ko Baksh Do Aisa Asar Garib Nawaz
Nazar Uthau To Aao Nazar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja, Khwaja Maharaja, Moinuddin Khwaja
Garib Jaye To Jaye Kidhar Garib Nawaz
Tumhara Dar Hai Muhammad Ka Dar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja....
Wahin Madad Ke Liye Aayenge Moinuddin
Labo Pe Aa Gaya Tere Agar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja....
Nazar Ho Jis Pe Teri Uska Puchna Hi Kya
Teri Nazar Hai Nabi Ki Nazar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja....
Main Pul Sirat Se Guzru To Is Tarah Guzru
Idhar Ho Gaus Piya Aur Idhar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja....
Rasool E Pak Ne Is Hind Ko Dua Di Hai
Basa Hai Jab Se Tumhara Nagar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja....
Padhaya Apne Lakho Ko Raah Mein Kalma
Kiya Madine Se Aisa Safar Garib Nawaz
Moinuddin Khwaja, Khwaja Maharaja, Moinuddin Khwaja
Khwaja Maharaja, Moinuddin Khwaja, Hind Ke Raja, Moinuddin Khwaja....
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यह सूफ़ी कव्वाली अजमेर शरीफ़ के महान संत हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (ग़रीब नवाज़) की बारगाह में लिखी गई एक बेहद रूहानी और मशहूर मनक़बत है। इसमें ख़्वाजा पिया की अज़मत, उनके चमत्कारी सफ़र और उम्मत पर उनके रूहानी एहसानों को बड़ी अक़ीदत के साथ पेश किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि "हे ग़रीब नवाज़! मेरी आँखों को ऐसी रूहानी दृष्टि दे दीजिए कि मैं जहाँ भी नज़र उठाऊँ, मुझे केवल आपका ही दीदार हो।" शायर कहता है कि दुनिया के ठुकराए हुए ग़रीब लोग भला आपके दर के सिवा और कहाँ जाएँ, क्योंकि आपका दरबार कोई साधारण दरबार नहीं बल्कि साक्षात हमारे आक़ा मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ का ही दरबार है।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| बक्श दो / असर | प्रदान करना (दान करना) / प्रभाव या ताक़त |
| ग़रीब नवाज़ | दीन-दुखियों और ग़रीबों पर कृपा करने वाला |
| पुल सिरात | परलोक (क़यामत) का वह बारीक रास्ता या पुल जिससे सबको गुज़रना है |
| गौस पिया | हज़रत शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (ग़ौस-ए-आज़म) |
| हिन्द / नगर | हिंदुस्तान (भारत) / शहर (यहाँ मुराद अजमेर शरीफ़ से है) |
| कलमा | इस्लाम का मूल पवित्र वाक्य (एकेश्वरवाद की गवाही) |
इस मुक़द्दस सूफ़ी कलाम का मूल सार यह है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की कृपादृष्टि वास्तव में नबी ﷺ की ही नज़र का अक्स है, जिसने मदीना मुनव्वरा से हिंदुस्तान का ऐतिहासिक सफ़र तय किया और यहाँ लाखों भटके हुए लोगों को सत्य (कलमा) का रास्ता दिखाया। शायर कहता है कि जब से अजमेर की पावन धरती पर ख़्वाजा का नगर बसा है, तब से पूरे हिंदुस्तान को रसूल-ए-पाक ﷺ की विशेष दुआ मिली हुई है। एक मुरीद को अपने गुरु पर इतना अटूट विश्वास है कि वह प्रार्थना करता है कि परलोक में जब वह कठिन 'पुल सिरात' से गुज़रे, तो एक तरफ़ मदद के लिए बग़दाद के शाह 'गौस पिया' खड़े हों और दूसरी तरफ़ स्वयं 'ग़रीब नवाज़' उसका हाथ थामे हुए हों।
लिरिक्स के मुताबिक, ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ ने लाखों लोगों को सीधा रास्ता (कलमा) दिखाने के लिए कहाँ से सफ़र किया था?